हार्वर्ड और एमआईटी (मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) यूनिवर्सिटी ने इस मामले में बुधवार को ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से जारी संदेश में इस आदेश को सियासी बताते हुए कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन ने यह आदेश बिना किसी सूचना के दिया। ऐसा लगता है कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी पर क्लासरूम खोलने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। प्रशासन को स्टूडेंट, इंस्ट्रक्टर और अन्य लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की कोई चिंता नहीं है।
बता दें कि आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) ने सोमवार को घोषणा की थी कि अमेरिका में पढ़ाई कर रहे विदेशी विद्यार्थियों को तब देश छोड़ना होगा या उन्हें निर्वासित होने के जोखिम का सामना करना होगा जब उनके विश्वविद्यालय सितंबर से दिसंबर के सेमेस्टर के लिए ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर देते हैं। इस निर्णय से अमेरिका में पढ़ रहे हजारों भारतीय विद्यार्थियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
इसमें कहा गया है कि साल 2020 में पड़ने वाले सेमेस्टर में पूरी तरह से ऑनलाइन कार्य करने वाले स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी पूर्ण ऑनलाइन पाठ्यक्रम का दबाव नहीं उठा पाएंगे और वे अमेरिका में रह सकते हैं। इस नियम की बड़े स्तर पर आलोचना हो रही है और लोग सोशल मीडिया पर अपने गुस्से का इजहार कर रहे हैं।
एसीई ने इस फैसले को बताया भयावह
अमेरिकन काउंसिल ऑन एजुकेशन (एसीई), जिसमें विश्वविद्यालय के अध्यक्षों का प्रतिनिधित्व होता, ने कहा कि यह दिशानिर्देश ‘भयावह’ है और इससे भ्रम की स्थिति पैदा होगी क्योंकि स्कूल सुरक्षित तरीके से उन्हें खोलने का रास्ता तलाशेंगे। एसीई के अध्यक्ष टेड मिशेल ने कहा, आईसीई द्वारा जारी दिशानिर्देश भयावह हैं।
हम अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों को लेकर और स्पष्टता का स्वागत करेंगे, यह दिशानिर्देश जवाब से अधिक सवाल उत्पन्न करते हैं और दुर्भाग्य से अच्छा करने के बजाय नुकसान अधिक कर रहे हैं। अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि यह दिशानिर्देश स्थिरता और स्पष्टता के बजाय भ्रम और जटिलता अधिक पैदा करता है।
'परिस्थितियों के प्रति बेपरवाह है प्रशासन'
काउंसिल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष टेरी हर्टले ने कहा कि खास चिंता इस बात को लेकर है कि दिशानिर्देश में उन विद्यार्थियों के लिए नियमों में छूट नहीं दी गई जिनके स्कूल महामारी के चलते ऑनलाइन कक्षाएं चलाने को मजबूर हुए हैं। यह भी स्पष्ट नहीं है कि तब क्या होगा जब विद्यार्थी इस परिस्थिति में पढ़ाई छोड़ देता है, लेकिन यात्रा प्रतिबंधों की वजह से स्वेदश लौट नहीं पाता है। स्पष्ट रूप से आईसीई संस्थानों को दोबारा खोलने के लिए उत्साहित कर रहा है और इस महामारी की वजह से उत्पन्न परिस्थितियों के प्रति बेपरवाह है।
नया नियम एफ-1 और एम-2 गैर आव्रजन वीजा पर लागू होता है जिसके तहत गैर आव्रजित छात्रों को क्रमश: अकादमिक और वोकेशनल पाठ्यक्रमों में पढ़ाई करने की अनुमति मिलती है। गैर लाभकारी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशलन एजुकेशन के मुताबिक अमेरिका में करीब 10 लाख विदेशी छात्र उच्च शिक्षा के लिए आते हैं।