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चीन को चुनौती: इंडो-पैसिफिक में फिर बड़ी आर्थिक भूमिका बनाएगा अमेरिका, जो बाइडन करेंगे एलान

Thu, 12 May 2022 04:08 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

वाशिंगटन स्थित जापान के राजदूत कोजी तोमिता ने कहा है कि जो बाइडन की जापान यात्रा के समय एक नए क्षेत्रीय इकोनॉमिक फ्रेमवर्क की औपचारिक रूप से शुरुआत की जाएगी। इस व्यापार पहल का नेतृत्व अमेरिका करेगा। जो बाइडन 20 से 24 मई तक दक्षिण कोरिया और जापान की यात्रा करेंगे...
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जो बाइडन - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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अमेरिका का जो बाइडन प्रशासन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक बार फिर से बड़ी आर्थिक भूमिका निभाना चाहता है। बताया जाता है कि राष्ट्रपति जो बाइडन अपनी अगली जापान यात्रा के दौरान इस बारे में खास एलान करेंगे। अमेरिकी विशेषज्ञों में ये राय बनी है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप (टीपीपी) समझौते से अमेरिका को हटा लेने का फायदा चीन को मिला है। इस कारण चीन की उस क्षेत्र में सबसे बड़ी आर्थिक भूमिका बन गई है।   

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वाशिंगटन स्थित जापान के राजदूत कोजी तोमिता ने कहा है कि जो बाइडन की जापान यात्रा के समय एक नए क्षेत्रीय इकोनॉमिक फ्रेमवर्क की औपचारिक रूप से शुरुआत की जाएगी। इस व्यापार पहल का नेतृत्व अमेरिका करेगा। जो बाइडन 20 से 24 मई तक दक्षिण कोरिया और जापान की यात्रा करेंगे। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने पिछले महीने कहा था कि राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान अमेरिका ‘मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक’ के प्रति ठोस प्रतिबद्धता जताएगा।

पिछले साल अक्तूबर में जताया था इरादा

वेबसाइट एक्सियोस.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक बाइडन ने पिछली अक्तूबर में ही एक नए इंडो पैसिफिक फ्रेमवर्क की शुरुआत का इरादा जताया था। इस साल फरवरी में उसके बारे में कुछ विवरण जारी किए गए। तब कहा गया कि ये फ्रेमवर्क अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति का ही एक हिस्सा है। अब ये जानकारी दी गई है कि इस पहल का औपचारिक नाम इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क (आईपीईएफ) होगा। समझा जाता है कि इसमें व्यापार, डिजिटल स्टैंडर्ड, श्रम संबंधी मुद्दों, स्वच्छ ऊर्जा और बुनियादी ढांचा आदि को शामिल किया जाएगा। लेकिन अमेरिका के वाणिज्य मंत्री गिना रैमोन्डो ने कहा है कि यह फ्रेमवर्क परंपरागत व्यापार समझौते जैसा नहीं होगा।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक इसके पहले जापान ने अमेरिका से गुजारिश की थी कि वह कॉम्प्रिहेंसिव एंड प्रोग्रेसिव एग्रीमेंट फॉर ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप (सीपीटीपीपी) में शामिल हो जाए। जब अमेरिका ने खुद को टीपीपी से अलग कर लिया था, तो इस प्रयास में शामिल बाकी देशों ने दिसंबर 2018 में सीपीटीपीपी नाम से नया मुक्त व्यापार समझौता किया था। इसमें कुल 15 देश शामिल हैं। अमेरिकी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक मुक्त व्यापार समझौतों में भागीदारी को लेकर अमेरिका में गहरे मतभेद हैं। इसलिए सीपीटीपीपी में शामिल होने के बजाय बाइडन प्रशासन ने एक नई पहल की शुरुआत करने का फैसला किया है।

चाहिए होगी अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी

विश्लेषकों के मुताबिक सीपीटीपीपी में शामिल होने के फैसले को अमेरिकी कांग्रेस (संसद) से मंजूरी दिलानी होती। रिपब्लिकन पार्टी के विरोध को देखते हुए ऐसा करना बाइडन प्रशासन को मुफीद नहीं लगा। विशेषज्ञों एलेक्जेंड्रेका नेतालेगावा और ग्रेग पॉलिंग ने पिछले हफ्ते एक टिप्पणी में लिखा- बाइडन प्रशासन आईपीईएफ की शुरुआत राष्ट्रपति के आदेश से करेगा। व्यापार समझौतों की तरह इसे संसदीय मंजूरी दिलाने की जरूरत नहीं होगी।  

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खबरों के मुताबिक रिजनल कॉप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) समझौता जब से लागू हुआ है, अमेरिका में गहरी चिंता है। चीन भी इस मुक्त व्यापार समझौते का हिस्सा है। समझा गया है कि इससे चीन ने इस क्षेत्र में आर्थिक संबंधों के रास्ते अपना प्रभाव मजबूत कर लिया है। अब अमेरिका ने इसकी भरपाई करने की नई योजना बनाई है, जिसका पूरा ब्योरा इसी महीने सामने आ जाएगा।

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