कोर्ट में पेश अपनी रिपोर्ट में अर्थशास्त्रियों ने कहा है- ‘इस बात के पर्याप्त साक्ष्य हैं कि अमेरिका में महिलाओं ने सामाजिक और आर्थिक जीवन में जो प्रगति हासिल की, उसमें गर्भपात के मिले अधिकार की बड़ी भूमिका रही है। अगर इस अधिकार में कटौती हुई, तो उसका महिलाओं के जीवन पर गहरा नकारात्मक असर होगा।’
अमेरिका में महिला अधिकार संगठन गर्भपात अधिकार को संकुचित करने के प्रयासों के खिलाफ लगातार आंदोलन चला रहे हैं। महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था इंस्टीट्यूट फॉर वूमन्स पॉलिसी रिसर्च की मुख्य कार्यकारी अधिकारी निकोल मेसन ने कहा है कि गर्भपात पर नियंत्रण का महिलाओं की जिंदगी पर वास्तविक और ठोस असर होता है। इससे शिक्षा प्राप्त करने की उनकी संभावना बाधित होती है, उनका वेतन और करियर के विकल्प सीमित हो जाते हैं और श्रम शक्ति (लेबर फोर्स) में उनके भाग लेने की संभावना घट जाती है। इस सबकी वजह से उनके गरीबी में चले जाने का जोखिम बढ़ जाता है।
अमेरिकी की कई बड़ी कंपनियां भी गर्भपात अधिकार के खिलाफ हो रहे प्रयासों से परेशान हैं। इसी हफ्ते 50 से अधिक कंपनियों ने एक साझा बयान में कहा कि गर्भपात पर प्रतिबंध से हमारी महिला कर्मियों और ग्राहकों की सेहत, स्वतंत्रता और आर्थिक स्थिरता खतरे में पड़ जाएगी। थिंक टैंक सेंटर ऑन इकॉनमिक्स ऑफ रिप्रोडक्टिव हेल्थ ने अपने एक अध्ययन में कहा है कि गर्भपात अधिकार संकुचित होने से अर्थव्यवस्था को हर साल 105 अरब डॉलर का नुकसान होगा। ऐसा महिलाओं की लेबर फोर्स में भागीदारी घटने और उनकी आमदनी घटने के कारण होगा।
निकोल मेसन ने ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स से कहा- ‘गर्भपात कराना चाहिए या नहीं, इसके पक्ष और विपक्ष में कई नैतिक तर्क हो सकते हैं। लेकिन इस चर्चा में इस बात का जिक्र नहीं होता कि गर्भपात से रोकने का महिलाओं और उनके परिवारों पर आर्थिक प्रभाव क्या होता है।’