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अमेरिकी एजेंसी का वायरस से खतरे वाली सूची में बदलाव, अब गर्भवती महिलाएं भी शामिल

Fri, 26 Jun 2020 01:23 PM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
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गर्भवती महिलाओं में कोरोना संक्रमण का खतरा ज्यादा - फोटो : डेमो
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अमेरिका की शीर्ष पब्लिक हेल्थ एजेंसी ने कोरोना वायरस से पीड़ित गंभीर मरीजों की सूची की एक बार फिर समीक्षा की है और उम्र घटक को हटाकर सूची में गर्भवती महिलाओं को शामिल किया है। सूची में उन अमेरिकी लोगों को शामिल किया गया है जिनमें संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा है।

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अमेरिकी की सीडीसी यानी सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन ने सूची में और बदलाव किए हैं जिससे वायरस के संक्रमण का शिकार होने वाले और वायरस से मरने वाले मरीजों को जांचा जा सके। इन बदलावों में नस्लीय भेद को शामिल नहीं किया गया है। जबकि अमेरिका में अश्वेत अमेरिकी, हिस्पैनिक और नेटिव अमेरिकी लोगों पर संक्रमण का ज्यादा खतरा है।

एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि ये बदलाव मेडिकल शोधों के आधार पर तैयार किए गए हैं। एजेंसी का कहना है कि इन बदलावों को स्वतंत्रता दिवस से पहले छपवाना है ताकि इस दिन भीड़ लगाने से पहले लोगों तक यह सूचना पहुंच जाए। सीडीसी के निदेशक रॉबर्ट रेडफिल्ड का कहना है कि जिनमें संक्रमण का खतरा ज्यादा बना रहेगा, वो दूसरे लोगों से दूरी बनाकर रखें।
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उन्होंने कहा कि खुद को संक्रमण से बचाने के लिए कम से कम लोगों से मिले और अपने घर में रहें। यही सलाह उन लोगों के लिए भी है जो कोरोना के मरीजों की देखभाल कर रहे हैं या उनके साथ रह रहे हैं। सीडीसी ने पहले बताया था कि 65 साल से ज्यादा उम्र के लोग, मरीजों के साथ रहने वाले और उनकी देखभाल करने वाले, दिल की बीमारी वाले मरीज, मोटापा, मधुमेह, फेफड़े की बीमारी वाले मरीजों के लिए संक्रमण का ज्यादा खतरा है। 

लेकिन नए बदलावों में सीडीसी ने कुछ वर्ग तैयार किए हैं जिसमें उन लोगों कोे शामिल किया गया है जिनमें संक्रमण का खतरा ज्यादा या ज्यादा हो सकता है। सीडीसी ने कहा कि किसी व्यक्ति की उम्र जितनी ज्यादा होगी वो उतना से खतरे के समीप रहेगा लेकिन नए बदलाव में सीडीसी ने 65 साल वाले वर्ग को हटा दिया है।

सीडीसी की ओर ये जो नई सूची जारी की गई है उसमें गर्भवती महिला, धूम्रपान करने वाले लोग, अस्थमा के मरीज, दिमाग तक खून का बहाव रोकने वाली बीमारी, श्वास अवयव में संक्रमण, हाई ब्लड प्रेशर, पागलपन, गुर्दे की बीमारी, फेफड़ों की बीमारी, टाइप-1 मधुमेह, थेलेसिमिया और जिन लोगों का इम्यून सिस्टम एचआईवी वायरस की वजह से कमजोर हो गया है, को शामिल किया गया है।

सीडीसी ने गर्भवती महिलाओं को उसी दिन नई सूची में शामिल कर लिया था जब एक रिपोर्ट के हवाले से पता चला था कि लगभग नौ फीसदी प्रसव वाली महिलाओ में कोरोना का संक्रमण देखा गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि कोरोना वायरस के संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा गर्भवती महिलाओं को है। 

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