संयुक्त राष्ट्र इन दिनों बड़े वित्तीय संकट से जूझ रहा है। सदस्य देशों की ओर से समय से बकाया भुगतान न किए जाने से संयुक्त राष्ट्र में बजट की कमी होने लगी है। इसके चलते संयुक्त राष्ट्र के अफसरों ने अपने 60 से अधिक कार्यालयों, एजेंसियों और परिचालनों को कर्मचारियों में से 20 फीसदी की छंटनी करने के लिए कहा है। सभी को जून के मध्य तक प्रस्ताव प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बताया कि इस कटौती से नियमित बजट के अंतर्गत आने वाले लगभग 14,000 पद समेत लगभग 2,800 अन्य पद प्रभावित होंगे। इनमें संयुक्त राष्ट्र के राजनीतिक और मानवीय कार्यालयों के कर्मचारी और शरणार्थियों की मदद करने वाली, लैंगिक समानता को बढ़ावा देने वाली और अंतरराष्ट्रीय व्यापार, पर्यावरण और शहरों से निपटने वाली एजेंसियां शामिल हैं। इसके अजावा फलस्तीनी शरणार्थियों का समर्थन करने वाली संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूएनआरडब्ल्यूए भी इस सूची में है। दुजारिक ने कहा कि इन्हें प्रस्तावित 2026 बजट में शामिल किया जाएगा, जिसे दिसंबर में महासभा द्वारा अपनाया जाएगा।
बजट में की जानी है 15 से 20 फीसदी की कटौती
संयुक्त राष्ट्र नियंत्रक चंद्रमौली रामनाथन ने प्रभावित एजेंसियों को भेजे पत्र में कहा है कि संयुक्त राष्ट्र के 3.72 अरब डॉलर के मौजूदा बजट में 15 से 20 प्रतिशत की कटौती की जानी है। कर्मचारियों की कटौती महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा शुरू की गई संयुक्त राष्ट्र 80 सुधार पहल का हिस्सा है।
नियंत्रक ने अपने पत्र में एजेंसियों के प्रमुखों को सलाह दी है कि किन पदों में कटौती की जाए। उन्होंने कहा कि कार्यों का मूल्यांकन दक्षता के आधार पर करें, प्रभाव के आधार पर प्राथमिकता तय करें; एकीकरण या उन्मूलन के लिए अनावश्यक, अतिव्यापी या गैर-महत्वपूर्ण कार्यों या भूमिकाओं को लक्षित करें। प्रस्तावित कटौतियों को 13 जून तक नियंत्रक को प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
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सदस्य देश नहीं कर रहे बकाया भुगतान
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने का कहना है कि पिछले सात वर्षों में संयुक्त राष्ट्र के संसाधनों में कमी आई है। क्योंकि सभी सदस्य देश अपने वार्षिक बकाया का भुगतान नहीं करते हैं और कई समय पर भुगतान नहीं करते हैं। पिछले साल संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से 152 ने अपना पूरा बकाया चुकाया। इसमें चीन भी शामिल था। लेकिन 41 देशों ने ऐसा नहीं किया, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका भी शामिल था। इस बार अमेरिका से नियमित बजट का 22% भुगतान करने की उम्मीद है। जबकि चीन ने हाल ही में अपना हिस्सा बढ़ाकर 20% कर दिया है।
ट्रंप के आदेश के बाद शुरू हुई कटौती
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चार फरवरी के एक कार्यकारी आदेश में संयुक्त राष्ट्र सहित सभी अंतरराष्ट्रीय संगठनों में अमेरिका की भागीदारी और फंडिंग की 180 दिनों के भीतर समीक्षा करने का आदेश दिया है। इसके बाद से संयुक्त राष्ट्र में कटौती शुरू हुई है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख कटौती को इससे जोड़ने से इनकार कर रहे हैं।
डब्ल्यूएफपी ने अपने कर्मचारियों में 30% तक की कटौती करने, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी यूएनएचसीआर ने लागत में 30% की कमी लाने के लिए अपने मुख्यालय और क्षेत्रीय कार्यालयों का आकार छोटा करने और वरिष्ठ स्तर के पदों में 50% की कटौती करने की तैयारी की है। वहीं संयुक्त राष्ट्र की बाल एजेंसी यूनिसेफ और संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता एजेंसी OCHA सहित अन्य एजेंसियों ने भी कटौती की घोषणा की है।
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11 शांति अभियान चलाता है संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र संघ 11 शांति अभियान चलाता है। इनकी एक अलग बजट से फंडिंग की जाती है। जबकि यूएन की कई दूर-दराज की एजेंसियों और कार्यों को पूरी तरह से स्वैच्छिक योगदान से फंड दिया जाता है, जिसमें रोम स्थित विश्व खाद्य कार्यक्रम भी शामिल है, जिसे WFP के रूप में जाना जाता है।