ग्लोबल वार्मिंग के संकट के बीच मिस्र में संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन कॉप27 शुरू हो गया। मिस्र के इस तटीय शहर में जुटे दुनियाभर के प्रतिनिधियों के बीच इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा को लेकर सहमति बनी है कि क्या अमीर देशों के कारण जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले गरीब देशों को मुआवजा देना चाहिए। यह पहली बार है कि कॉप-27 ने अपने एजेंडे में औपचारिक तौर पर जलवायु मुआवजे को शामिल किया है।
संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए जमा हुए 190 से भी अधिक देशों के प्रतिनिधियों के बीच देर रात तक चली बैठक में इस पर सहमति बनी। प्रतिनिधियों ने जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से जुड़े नुकसान और क्षति से निपटने पर ध्यान देने समेत इसके वित्तपोषण की व्यवस्था संबंधी मामलों के बारे में चर्चा करने के एजेंडे को मंजूरी दे दी। पिछले एक दशक से भी अधिक समय से अमीर देश नुकसान और क्षति को संदर्भित करने और बढ़ते तापमान के दुुष्परिणामों से निपटने के लिए उनकी तरफ से गरीब देशों को मुहैया कराए जाने वाले धन पर औपचारिक चर्चा को खारिज करते आ रहे थे। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया यूक्रेन युद्ध, उच्च महंगाई, खाद्यान की कमी और ऊर्जा संकट जैसे मुश्किलों का सामना कर रही है। सम्मेलन 18 नवंबर तक चलेगा।
कॉप-27 के अध्यक्ष मिस्र के विदेश मंत्री समेह शौकरी ने कहा कि कॉप-27 के एजेंडे पर नुकसान और क्षति की चर्चा मुआवजे की गारंटी नहीं देगी या अनिवार्य रूप से जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं करेगी, लेकिन 2024 तक इस मुद्दे पर एक सार्थक निर्णय लेने का मार्ग तैयार करेगी। जर्मनी की विदेश मंत्री अनालेना बेरबॉक ने एक बयान में कहा, मैं अमीर देशों से अधिक एकजुुटता की उम्मीद करती हूं। जर्मनी जलवायु वित्तपोषण और नुकसान व क्षति से निपटने में सहयोग देने के लिए तैयार है।
इससे पहले, संयुक्त राष्ट्र के जलवायु वैज्ञानिक पैनल के प्रमुख ने अपने उद्घाटन भाषण में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती और धरती के तापमान में वृद्धि को रोकने के उपायों को तत्काल अपनाने की जरूरत का उल्लेख किया। जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल के प्रमुख होसुंग ली ने कहा, यह हमें अपने ग्रह और आजीविका को बचाने के लिए पीढ़ियों में एक मौका मिला है।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पीएम ने सुझाया है सरल समाधान : भूपेंद्र
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने रविवार को कहा कि भारत मानता है कि जलवायु को बचाने का काम व्यक्तिगत स्तर पर शुरू होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाइफ आंदोलन के जरिये जलवायु परिवर्तन की जटिल समस्या से निपटने का सरल समाधान सुझाया है। यादव ने मिस्र के शर्म अल-शेख शहर में रविवार को कॉप27 जलवायुु शिखर सम्मेलन में भारतीय मंडप का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। लाइफ की थीम पर ही भारतीय मंडप को डिजाइन किया गया है। यादव ने कहा कि भारत जलवायु वित्तपोषण से संबंधित चर्चा में उल्लेखनीय प्रगति की उम्मीद कर रहा है। लाइफ से मतलब पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली से है। यह एक जन और ग्रह समर्थक प्रयास है। इसका उद्देश्य दुनिया को प्राकृतिक संसाधनों के अनावश्यक और अविवेकी उपभोग से साधानीपूर्वक और विवेकी उपयोग की तरफ ले जाना है। एजेंसी
1.5 डिग्री तक तापमान रखने की कोशिश जारी
शिखर वार्ता के निर्वतमान अध्यक्ष रहे ब्रिटेन के आलोक शर्मा ने कहा कि ग्लास्गो सम्मेलन के बाद उत्सर्जन में कटौती समेत कई क्षेत्रों में प्रगति हुुई है। हमने पेरिस समझौते के सबसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने की उम्मीद को जिंदा रखा है। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने ट्विटर पर लिखा, मेजबान होेने के नाते उनका देश ठोस जमीनी उपायों के साथ वार्ता को संकल्प के चरण से कार्यान्वयन के चरण में ले जाने की कोशिश करेगा।
पिछले आठ साल से लगातार बढ़ी गर्मी
धरती के बढ़ते तापमान को लेकर जारी चिंता के बीच संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी की रिपोर्ट ने और डरावनी तस्वीर पेश की है। इसके मुताबिक पिछले आठ साल से लगातार गर्मी बढ़ रही है। ये आठ साल रिकार्ड आठ गर्म वर्ष होने की राह पर हैं और इसकी मुख्य वजह ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि और संचित गर्मी है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की 2022 में वैश्विक जलवायु की अस्थायी स्थिति की रिपोर्ट के अनुसार इस साल दुुनियाभर में भीषण लू, सूखा और विनाशकारी बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हुए और अरबों का नुकसान हुआ।