संयुक्त राष्ट्र में बुधवार को भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने यूएन के कामकाज के तरीकों और इसके सीमित ढांचे को लेकर निशाना साधा। अलग-अलग देशों के बीच विवादों को कम करने के मुद्दे का जिक्र करते हुए कंबोज ने कहा, "2009 के बाद से जिस तरह हम देशों के बीच अलगाव को पाटने की कोशिश कर रहे हैं और मुद्दों पर संमिलन के लिए कोशिशें बढ़ा रहे हैं। अब उसी तरह अंतरसरकारी समझौतों के 15वें साल में पहुंचने के साथ मेरे और मेरे प्रतिनिधिमंडल का यह मानना है कि हम नई बोतलों में पुरानी शराब रखकर नए नतीजों की उम्मीद नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि केवल बातचीत ही हमें आगे तक ले जा सकते हैं।'
उन्होंने आगे कहा, 'हम जानते हैं कि देश तब तक अपनी स्थिति नहीं बदल सकती है, जब तब हम बातचीत न करें। मैं आप सभी को याद दिलाना चाहती हूं कि भविष्य का शिखर सम्मेलन अंतरसरकारी वार्ता नहीं होगा, बल्कि एक अंतर-सरकारी वार्ता प्रक्रिया जैसा होगा। हमें वास्तविक होने की जरूरत है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, इस मामले में भारत तत्काल कार्रवाई करते हुए ग्लोबल साउथ (वैश्विक दक्षिण) की आवाज को उठाने के लिए प्रयास करना जारी रखेगा।'
इस्राइल-हमास संघर्ष के बीच गाजा में युद्धविराम के लिए मतदान कर चुका है भारत
गौरतलब है कि एक दिन पहले ही संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर भारत ने इस्राइल और हमास के हिंसक संघर्ष को खत्म करने के प्रस्ताव का समर्थन किया था। इस्राइल और अमेरिका सरीखे देशों के मजबूत प्रतिरोध के बावजूद भारत ने युद्धविराम प्रस्ताव का समर्थन किया। भारत का रूख स्पष्ट करते हुए संयुक्त राष्ट्र में राजदूत रुचिरा कंबोज ने कहा, टकराव बढ़ने के इस कठिन दौर में दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती फैसलों के बीच सही संतुलन कायम करना है।
उन्होंने हमास और इस्राइल के टकराव को असाधारण और कठिन समय करार दिया। संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि और भारतीय राजदूत रुचिरा कंबोज ने कहा, 193 सदस्यीय UNGA में भारत ने महासभा में अभी अपनाए गए प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है। उन्होंने कहा, UNGA महासचिव ने संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुच्छेद 99 को लागू किया है। महासभा ने इस पहल के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों की गंभीरता और जटिलता को रेखांकित किया है।