संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष डेनिस फ्रांसिस का कहना है कि भारत बहुपक्षवाद का समर्थक है। लगातार वैश्विक मामलों में मजबूत योगदान देने से इसका वर्चस्व लगातार बढ़ रहा है। अपने कार्यकाल के अंत से पहले 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र निकाय के प्रमुख के तौर पर डेनिस फ्रांसिस ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र में मजूबत नेता है। इसमें कोई संदेह नहीं है।
फ्रांसिस ने कहा कि उम्मीद है वैश्विक मामलों में भारत की भूमिका जारी रहेगी और मजबूत होगी। हम जानते हैं कि भारत सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनना चाहता है। इसके सदस्य निर्णय लेंगे कि कैसे परिषद में बदलाव किया जाए। साथ ही मौजूदा सदस्यों का प्रतिनिधित्व करने के लिए कौन से देश उपयुक्त होंगे। मुझे यकीन है कि कोई भी इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं करेगा कि वैश्विक मामलों में भारत लगातार मजबूत योगदान दे रहा है। उसका यह प्रदर्शन जारी रहेगा।
फ्रांसिस ने कहा कि भारत ने वैश्विक दक्षिण में विकासशील देशों के साथ अपनी विशेषज्ञता साझा करने में एक उन्नत विकासशील देश के रूप में प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है। डिजिटलीकरण और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की बहुत गहरी रुचि है। क्योंकि डिजिटलीकरण देशों में मौजूद क्षमता को अनलॉक करने की कुंजी है। डिजिटलीकरण आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी है।
फ्रासिंस ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पार्वथनेनी हरीश से मुलाकात को लेकर कहा कि स्पष्ट है कि हरीश बहुत अधिक ऊर्जा और परिप्रेक्ष्य के साथ आए हैं। उन्होंने दुनिया में शांति और सुरक्षा की वर्तमान स्थिति, भविष्य के शिखर सम्मेलन, एसडीजी को टर्बोचार्ज करने में डिजिटलीकरण की भूमिका पर चर्चा की।
गाजा की स्थिति को लेकर हुई बातचीत पर फ्रांसिस ने कहा हम उम्मीद करते हैं कि इस कठिन स्थिति को समाप्त करने के लिए प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक भागीदारों को समर्थन जरूरी है। इससे ही युद्ध विराम का समाधान निकाला जा सकता है। फ्रांसिस ने कहा कि वह हरीश और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा कि मुझे यकीन है कि मैं इसका उतना ही आनंद लूंगा जितना मैंने पूर्व राजदूत रुचिरा कंबोज के साथ काम करके लिया था। उन्होंने कंबोज को महान सहयोगी और मित्र बताया।
22-23 सितंबर को होने वाले संयुक्त राष्ट्र के भविष्य के शिखर सम्मेलन को लेकर फ्रांसिस ने कहा कि शिखर सम्मेलन में सदस्य देश मुद्दे उठाने में सक्षम होंगे। यह भविष्य का समझौता है, जो सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा को फिर से सक्रिय करने में मदद करेगा। साथ ही जलवायु परिवर्तन और परमाणु निरस्त्रीकरण सहित महत्वपूर्ण वैश्विक चुनौतियों का समाधान करेगा।
उन्होंने कहा कि हम इस समय बेहद खतरनाक मूड में हैं। परमाणु तनाव फिर से बढ़ गया है। उम्मीद है कि शिखर सम्मेलन में विश्व के नेता भविष्य के लिए संधि को अपनाएंगे। फ्रांसिस ने कहा कि बहुपक्षवाद अभी मरा नहीं है। वास्तव में काफी जीवंत है। उम्मीद है कि भविष्य का शिखर सम्मेलन यह प्रदर्शित करेगा कि बहुपक्षवाद किस हद तक है और यह एक गतिशील, उत्पादक, परिणाम-उन्मुख, समस्या-समाधान प्रक्रिया बना है।
फ्रांसिस इस साल 22-26 जनवरी तक आधिकारिक यात्रा पर भारत में थे। इस दौरान उन्होंने नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठक की और जयपुर और मुंबई की यात्रा भी की थी। यात्रा के दौरान उन्होंने सरकारी अधिकारियों समेत लोगों से चर्चा की थी, जिसमें तकनीक और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे जैसा मुद्दा केंद्र में था। जिसके बाद से ही संयुक्त राष्ट्र के अध्यक्ष भारत के डिजिटलाइजेशन मॉडल के मुरीद हो गए।