अमेरिका में सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी के अंदर चल रही खींचतान अब अपने फ्लैश प्वाइंट (निर्णय के मौके) पर पहुंच गई है। बुधवार को (भारतीय समय के अनुसार) सीनेट में महत्वपूर्ण वोटिंग राइट्स (मताधिकार) बिल पेश होगा। इसके साथ ही फिलिबस्टर नियम को खत्म करने का मुद्दा भी सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी के सामने आ जाएगा। फिलिबस्टर नियम के तहत किसी बिल को पास करने के लिए 100 सदस्यीय सदन में 60 वोट अनिवार्य हो जाते हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी का प्रोग्रेसिव धड़ा इस नियम को खत्म कर वोटिंग राइट्स बिल पारित कराने की वकालत करता रहा है।
अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में वोटिंग राइट्स बिल फॉर द पीपुल एक्ट नाम से पारित हो चुका है। उच्च सदन सीनेट में देखने की पहली बात यह होगी कि क्या इस मुद्दे पर डेमोक्रेटिक पार्टी के सभी 50 सीनेटर एकजुट रहते हैं। अगर बिल को 50 वोट मिल गए, तब इस मुद्दे पर चर्चा शुरू होगी कि अब कैसे आगे बढ़ा जाए।
इसी दौरान फिलिबस्टर नियम को रद्द करने या कम से कम उसमें संशोधन करने का मसला सामने आएगा। अगर फिलिबस्टर नियम को बदलने पर पार्टी में सहमति नहीं बनी, तो ना सिर्फ वोटिंग राइट्स बिल, बल्कि राष्ट्रपति जो बाइडन के 2.3 ट्रिलियन डॉलर इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज का पास होना भी कठिन हो जाएगा। गौरतलब है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के कई सीनेटर फिलबिस्टर नियम से छेड़छाड़ करने का विरोध करते रहे हैं।
टीवी चैनल सीएनएन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चक शुमर के सामने उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। उन्हें पार्टी के प्रोग्रेसिव और उदारवादी धड़ों के बीच आम सहमति बनाने की मुश्किल चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। रिपब्लिकन पार्टी वोटिंग राइट्स बिल और इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज का उसके मूल रूप में समर्थन ना करने का एलान कर चुकी है। अब डेमोक्रेटिक पार्टी इन मुद्दों पर एकजुट नहीं हो पाई, तो राष्ट्रपति बाइडन की तमाम योजनाओं पर पानी फिर सकता है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक डेमोक्रेटिक पार्टी में सबकी निगाहें वेस्ट वर्जीनिया राज्य से सीनेटर जो मेंचिन पर टिकी हैं। वे फॉर द पीपुल एक्ट का समर्थन कर उसे आगे की प्रक्रिया के लिए भेजने के पक्ष में मतदान करेंगे या नहीं, यह उन्होंने साफ नहीं किया है। लेकिन मेंचिन ने यह साफ कहा है कि वे फिलिबस्टर नियम में बदलाव के किसी प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेंगे। यही बात एरिजोना राज्य से डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर क्रिस्टीन सिनेमा ने भी कही है।
वेबसाइट एक्सियोस.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर मेंचिन फॉर द पीपुल्स एक्ट की प्रक्रिया पर मतदान के दौरान पार्टी के साथ बने रहते हैं, लेकिन फिलिबस्टर नियम बदलने के पक्ष में वोट नहीं डालते, तो उससे असल में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। डेमोक्रेटिक पार्टी इस बिल पर फिलबस्टर नियम जरूर लागू करेगी, जिससे उस प्रक्रिया के दौरान ये बिल गिर जाएगा। इसलिए कि इस बिल के पक्ष में 60 वोट जुटाना डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए असंभव है।
फॉर द पीपुल एक्ट का मकसद पिछले नवंबर के बाद से रिपब्लिकन पार्टी के शासन वाले राज्यों में मताधिकार को संकुचित करने वाले कानूनों को बेअसर करना है। अलग-अलग राज्यों में बने उन कानूनों के तहत ऐसे नियम लागू किए गए हैं, जिनसे अल्पसंख्यक और गरीब तबकों के लोगों के लिए मतदान करना मुश्किल हो जाएगा। ये तबके आम तौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी के वोटर माने जाते हैं।
राष्ट्रपति जो बाइडन कह चुके हैं कि फॉर द पीपुल एक्ट को पारित कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इसे पास कराने का जिम्मा उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस को सौंपा है, जो सीनेट की सभापति भी हैं। दरअसल, ये बिल साधारण बहुमत से भी पारित हो पाएगा, जब डेमोक्रेटिक पार्टी के सभी सीनेटर एकजुट रहें और कमला हैरिस सभापति के रूप में अपना निर्णायक मतदान करें। लेकिन ऐसा होने के बाद भी फिलबस्टर की चुनौती बनी रहेगी।