फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष: अब तक करीब 500 नागरिकों की मौत, UN की रिपोर्ट में क्या-क्या खुलासे हुए?

Tue, 28 Jul 2026 02:57 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, एथेंस।

सार

पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर ताजा संघर्ष में अब तक करीब 500 नागरिकों की मौत हुई है। यूएन की रिपोर्ट में हवाई हमलों, तालिबान की पाबंदियों और महिलाओं की मुश्किलों से जुड़े कई बड़े खुलासे हुए हैं। जानिए इस रिपोर्ट में क्या-क्या सामने आया।
विज्ञापन
पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष में सैकड़ों लोगों की मौत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर जारी संघर्ष में अक्तूबर से जून के अंत तक अफगानिस्तान में करीब 500 नागरिकों की मौत हुई है और 1,000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
विज्ञापन


रिपोर्ट में क्या कहा गया?
  • मानवाधिकार की स्थिति पर जारी अपनी रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन अफगानिस्तान (यूएनएएमए) ने बताया कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच संघर्ष में 499 नागरिक मारे गए और 1,216 लोग घायल हुए हैं।
  • रिपोर्ट में बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति की कोशिशों के बावजूद यह संघर्ष जारी है।
  • इसमें एक घटना का जिक्र करते हुए कहा गया कि हवाई हमले के मलबे से लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे नागरिकों पर दूसरा हमला किया गया। 
  • रिपोर्ट में मानवाधिकार से जुड़े अन्य मुद्दों का भी जिक्र किया गया है। इनमें पश्चिमी अफगानिस्तान में महिलाओं के कपड़ों पर लगाए गए प्रतिबंधों के खिलाफ हुए प्रदर्शनों पर हुई सख्त कार्रवाई और ऐसे आदेश शामिल हैं, जो वास्तव में बाल विवाह को कानूनी मान्यता देते हैं।

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर क्या आरोप लगाए?
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कई महीनों से रुक-रुककर संघर्ष जारी है। फरवरी में तनाव काफी बढ़ गया, जब अफगान बलों ने अफगानिस्तान के अंदर पाकिस्तानी हवाई हमलों के जवाब में पाकिस्तान में हमला किया। इसके बाद इस्लामाबाद ने इसे 'खुला युद्ध' बताया।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: जापान के क्यूशू इलाके में आया 7.1 तीव्रता का भूकंप, सुनामी की चेतावनी जारी

पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान ऐसे आतंकियों को पनाह दे रहा है, जो पाकिस्तान में घातक हमले करते हैं। इन हमलों में पिछले कई वर्षों में हजारों लोग मारे गए हैं। इनमें खासतौर पर पाकिस्तानी तालिबान यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) शामिल है। यह संगठन अफगान तालिबान का सहयोगी है, जिसने 2021 में अमेरिका के नेतृत्व वाली सेनाओं की वापसी के दौरान अफगानिस्तान में सत्ता संभाली थी। काबुल ने इन आरोपों से इनकार किया है।

कब हुआ सबसे घातक हमला?
इस संघर्ष के सबसे घातक हमले में मार्च में पाकिस्तानी हवाई हमले ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र को निशाना बनाया था, जिसमें सैकड़ों नागरिकों की मौत हुई थी। मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पिछले हफ्ते कहा था कि इस हमले की जांच संभावित युद्ध अपराध के तौर पर की जानी चाहिए।

पाकिस्तान ने अपने क्षेत्र में सीमा पार संघर्ष से हुई नागरिकों की मौतों का कुल आंकड़ा जारी नहीं किया है। संयुक्त राष्ट्र मिशन (यूएनएएमए) ने कहा कि उसे केवल अफगानिस्तान में हुई घटनाओं की निगरानी का अधिकार है।   

नागरिकों को निशाना बनाने के आरोप पर पाकिस्तान ने क्या कहा?
यूएनएएमए की रिपोर्ट पर लिखित जवाब में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार 'कई आतंकवादी संगठनों के लिए अब भी अनुकूल माहौल बनाए हुए है।'

पाकिस्तान के जवाब में अफगान नागरिकों की मौतों का जिक्र नहीं किया गया। इसमें कहा गया कि पाकिस्तानी सेना के हमले पूरी तरह से उन आतंकवादी ठिकानों, पनाहगाहों और सहायता ढांचे को निशाना बनाकर किए गए थे, जो पाकिस्तान के अंदर हमलों के लिए जिम्मेदार समूहों से जुड़े थे।

यूएनएएमए की रिपोर्ट के अनुसार, नागरिकों की मौत के मामलों में 22 लोग ऐसे थे, जिनमें पांच बच्चे भी शामिल थे। ये सभी 28 जून को पूर्वी प्रांत पक्तिया में एक रिहायशी इमारत पर हुए लगातार दो हवाई हमलों में मारे गए। इस हमले में कम से कम 185 अन्य लोग घायल हुए।

ज्यादातर लोगों की मौत और घायल होने की घटनाएं दूसरे हमले में हुईं। यह हमला उस समय हुआ, जब स्थानीय लोग पहले हमले में घायल लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे थे।

यूएनएएमए में मानवाधिकार निदेशक फियोना फ्रेजर ने कहा,अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून चिकित्सा कर्मियों और मानवीय सहायता से जुड़े लोगों को विशेष सुरक्षा देता है। इनमें शुरुआती बचाव कार्य करने वाले लोग भी शामिल हैं। अपने कर्तव्यों का पालन करते समय उन पर हमले पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। 

रिपोर्ट में महिलाओं की स्थिति पर क्या कहा गया?
यूएनएएमए की रिपोर्ट में महिलाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई गई है। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने महिलाओं पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें प्राथमिक शिक्षा से आगे पढ़ाई पर रोक, सख्त पहनावे के नियम, लगभग सभी क्षेत्रों में काम करने पर प्रतिबंध और घर से बाहर निकलने पर किसी पुरुष रिश्तेदार के साथ होने की अनिवार्यता शामिल है। 

रिपोर्ट में जून में पश्चिमी शहर हेरात में हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया गया है। यहां पहनावे के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में कम से कम 30 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया। हिरासत के खिलाफ हुए दुर्लभ प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों की गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हुई और कई लोग घायल हुए।

महिलाओं के कपड़ों से जुड़े नियम क्या हैं?
महिलाओं के कपड़ों से जुड़े नियमों के अनुसार, वे सार्वजनिक जगहों पर तभी जा सकती हैं, जब उन्होंने पूरा हिजाब पहना हो। इसमें सिर ढकने के लिए कपड़ा और पूरे शरीर को ढकने वाला लिबास शामिल है। इसके साथ चेहरे को भी ढकना जरूरी है, जिसमें केवल आंखें दिखाई दें। इन नियमों की निगरानी नैतिकता और सदाचार मंत्रालय के अधिकारी करते हैं। हालांकि, इन नियमों की व्याख्या और सही तरीके से हिजाब पहनने को लेकर अलग-अलग राय है। इन्हें मनमाने तरीके से लागू भी किया जा सकता है।
विज्ञापन


रिपोर्ट में कहा गया कि नैतिकता और सदाचार मंत्रालय के अधिकारियों ने देश के कई हिस्सों में स्वास्थ्य केंद्रों और दुकानों का दौरा किया और उन्हें ऐसे महिलाओं को प्रवेश देने से मना करने की सलाह दी, जो किसी पुरुष रिश्तेदार के साथ नहीं थीं।


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें