ईरान में सितम्बर में हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान 22 वर्षीय महसा अमीना की पुलिस हिरासत में मौत हो जाने के बाद लोग सड़कों पर उतर आए हैं और सरकार और मौलवियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इसको लेकर गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने विशेष सत्र बुलाया था जिसमें ईरान में हो रहे प्रदर्शनों पर चर्चा हुई।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार तुर्क ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के एक विशेष सत्र के दौरान ईरान में मानवाधिकारों के उल्लंघन में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच प्रक्रियाओं का आह्वान किया और इसकी जांच की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान के कुर्द अल्पसंख्यक समूह को निशाना बनाने के लिए जबरन हिरासत में लेने और शारीरिक शोषण की खबरों के साथ, अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों पर घातक कार्रवाई शुरू कर दी है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के बीच ईरान पूर्ण मानवाधिकार संकट में है। आगे उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने शासन के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर शिकंजा कस दिया है। यूएन मानवाधिकार प्रमुख ने कहा कि ईरान में जो कुछ हो रहा है, उसे देखकर मुझे बहुत तकलीफ होती है। बच्चों के मारे जाने की तस्वीरें, रास्तों-सड़कों पर महिलाओं को पीटे जाने की तस्वीरें सामने आ रही हैं और लोगों को मौत की सजा सुनाई जा रही हैं ये भयावह है।
एक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तुर्क के कहा कि विरोध प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में शामिल बच्चों सहित 14,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि उनमें से कम से कम 21 वर्तमान में मौत की सजा का सामना कर रहे हैं और छह को पहले ही मौत की सजा मिल चुकी है।
अमिनी की मौत के बाद इस्लामिक रिपब्लिक सरकार विरोधी प्रदर्शनों की लहर से घिर गया है। उन्होंने बताया कि इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड समेत देश के सुरक्षा बलों ने प्रदर्शन आंदोलन के विरुद्ध किस तरह जानलेवा बारूद और गोलीबारी का प्रयोग किया है। ये प्रदर्शन अब ईरान के सभी प्रांतों के 150 शहरों में और 140 विश्वविद्यालयों में फैल गए हैं।
तुर्क ने कहा कि हमें रिपोर्ट मिली है कि घायल प्रदर्शनकारी सुरक्षा बलों द्वारा गिरफ्तार किए जाने के जोखिम से बचने के लिए अस्पताल जाने से डरते हैं। मैं इन खबरों से चिंतित हूं कि यहां तक कि विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के संदेह मात्र वाले बच्चों को भी स्कूल में गिरफ्तार किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के सैकड़ों छात्रों को पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है, उनको निलंबन की धमकी दी जा रही हैं।