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Namami Gange: संयुक्त राष्ट्र ने 'नमामि गंगे' प्रोजेक्ट को सराहा, दुनिया की 10 प्रमुख पहलों में किया शामिल

Wed, 14 Dec 2022 03:44 PM IST
Jeet Kumar पीटीआई, मॉन्ट्रियल

सार

रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या वृद्धि, प्रदूषण में वृद्धि, औद्योगिकीकरण और सिंचाई ने गंगा क्षेत्र का काफी नुकसान किया है। 
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काशी में गंगा - फोटो : OnlinePrasad.com
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विस्तार
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भारत सरकार द्वारा 2014 में पवित्र नदी गंगा को साफ करने लेकर चलाया जाने वाला प्रोजक्ट 'नमामि गंगे' का दुनिया में डंका बज रहा है। मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र ने नमामि गंगे परियोजना को 10 अभूतपूर्व प्रयासों में शामिल किया है जिन्होंने प्राकृतिक दुनिया को बहाल करने को लेकर अहम भूमिका निभाई। वहीं इसको लेकर संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन (COP15) के दौरान एक रिपोर्ट जारी की गई। 

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जनसंख्या वृद्धि, प्रदूषण में वृद्धि, औद्योगिकीकरण से गंगा को हुआ नुकसान
नमामि गंगे परियोजना को संयुक्त राष्ट्र की मान्यता मिलने के बाद गंगा नदी के संरक्षण और उसकी जैव विविधता को बचाने के लिए समर्थित प्रमोशन, कंसल्टेंसी और डोनेशन प्राप्त हो सकेगा। वहीं रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या वृद्धि, प्रदूषण में वृद्धि, औद्योगिकीकरण और सिंचाई ने हिमालय से बंगाल की खाड़ी तक 2,525 किलोमीटर तक फैले गंगा क्षेत्र का काफी नुकसान किया है।

प्रदूषण और कचरे से निपटना अहम
यूएनईपी के कार्यकारी निदेशक इंगर एंडरसन ने कहा कि प्रकृति के साथ हमारे संबंधों में बदलाव, जलवायु संकट, प्रकृति और जैवविविधता के क्षरण, प्रदूषण और कचरे के तिहरे संकट से निपटने के लिए अहम है। संयुक्त राष्ट्र ने एक बयान में कहा कि गंगा नदी पुनर्जीवन परियोजना में गंगा के मैदानी हिस्सों की सेहत बहाल करना प्रदूषण कम करने, वन्य क्षेत्र का पुन: निर्माण करने तथा इसके विशाल तलहटी वाले इलाकों के आसपास रह रहे 52 करोड़ लोगों को व्यापक फायदे पहुंचाने के लिए अहम है।
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नमामि गंगा परियोजना से डॉल्फिन, कछुए, ऊदबिलाव जैसे जीवों का संरक्षण हो रहा है
बयान के अनुसार, सरकार के नेतृत्व वाली नमामि गंगे पहल गंगा और उसकी सहायक नदियों का कायाकल्प, संरक्षण कर रही है, गंगा बेसिन के कुछ हिस्सों में वनीकरण कर रही है और टिकाऊ खेती को बढ़ावा दे रही है। इस परियोजना का उद्देश्य प्रमुख वन्यजीव प्रजातियों को पुनर्जीवित करना है, जिनमें नदी डॉल्फिन, कछुए, ऊदबिलाव और हिलसा शाद मछली शामिल हैं। अब तक 4.25 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक के निवेश वाली इस पहल में 230 संगठनों की भागीदारी है, जिसमें 1,500 किमी नदी को आज तक बहाल किया गया है। 

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