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संयुक्त राष्ट्र प्रमुख की चेतावनी: अफगानिस्तान में आतंकियों पर लगानी होगी लगाम, वरना पूरी दुनिया चुकाएगी भारी कीमत

Thu, 27 Jan 2022 01:24 AM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र

सार

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने अफगानिस्तान में आतंकी संगठनों के प्रसार को पूरी दुनिया के लिए बढ़ा खतरा बताया है और इस चुनौती से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आगे आने की अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने तालिबान से भी कहा है कि उसे अपने नागरिकों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए।
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UN Secretary-General Antonio-Guterres - फोटो : UN
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विस्तार
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संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बुधवार को कहा कि अफगानिस्तान में सभी आतंकवादी गुटों के विस्तार को रोकना होगा। उन्होंने कहा कि यह देश बहुत लंबे समय से आतंकियों के लिए सुरक्षित स्थान बना हुआ है और अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने यहां के नागरिकों की मदद नहीं की तो इस क्षेत्र को और पूरी दुनिया को इसकी भारी कीमत अदा करनी पड़ेगी। 

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गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) को अफगानिस्तान पर अपनी ब्रीफिंग में कहा कि तालिबान की ओर से कब्जा किए जाने के छह महीने बाद अफगानिस्तान एक धागे से लटका हुआ है। यहां के नागरिकों के लिए दैनिक जीवन नर्क की तरह हो गया है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद न केवल अफगानिस्तान के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा बना है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाए तालिबान
यूएन महासचिव ने कहा, 'सुरक्षा को प्रोत्साहन देना और आतंकवाद से जंग लड़ना जरूरी है। अगर हम कार्रवाई नहीं करते हैं और अफगानिस्तान के नागरिकों की इस तूफान से निपटने में मदद नहीं करते हैं तो इस क्षेत्र को और पूरी दुनिया को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।' उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इससे पूरी दुनिया में अपराध और आतंकी नेटवर्क बढ़ेगा।
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इसके साथ ही उन्होंने तालिबान से कहा कि वह अफगानिस्तान में वैश्विक आतंकी खतरे को समाप्त करने के लिए वैश्विक समुदाय और यूएनएससी के साथ काम करे और सुरक्षा को प्रोत्साहन देने वाले संस्थानों गठित करे। तालिबान को अपने लोगों के लिए सुरक्षा और अवसरों का विस्तार और वैश्विक समुदाय का हिस्सा बनने के लिए अपनी प्रतिबद्धता का प्रदर्शन करना चाहिए।

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अफगानिस्तान में आईएसआईएल की लगातार मौजूदगी चिंता का विषय: भारत

भारत ने बुधवार को कहा कि अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड लेवेंट (आईएसआईएल) की मौजूदगी और गतिविधियां चिंता का विषय बनी हुई हैं क्योंकि यह आतंकवादी समूह देश और विदेश में अपनी शक्ति और प्रभाव का प्रदर्शन करने के लिए आतंक के "घृणित कृत्यों" को अंजाम देता है। तालिबान प्रतिबंध समिति 1988 के अध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने अफगानिस्तान पर चर्चा करने के लिए हुई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में यह बात कही।

उन्होंने कहा कि एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शन मॉनिटरिंग टीम ने अपनी 2021 की रिपोर्ट में कहा था कि हक्कानी नेटवर्क के जरिए तालिबान के अलकायदा समेत अन्य विदेशी आतंकवादी संगठनों के साथ संबंध बने हुए हैं। साझा विचारधारा, आम संघर्ष और अंतर्विवाह  के कारण ही इन संगठनों के बीच संबंध मजबूत बने हुए हैं।

तिरुमूर्ति ने कहा कि "आईएसआईएल (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड द लेवेंट) की निरंतर उपस्थिति और अफगानिस्तान में इसकी गतिविधियां हमारे लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि देश और विदेश में अपनी शक्ति और प्रभाव का प्रदर्शन करने के लिए इस आतंकवादी संगठन द्वारा उपयोग किए जाने वाले आतंकवादी हमले घृणित कार्य बन गए हैं।“

तिरुमूर्ति ने सुरक्षा परिषद को तालिबान प्रतिबंध समिति के काम के बारे में जानकारी दी और कहा कि प्रतिबंध व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य अंततः तालिबान और अफगान सरकार के बीच बातचीत को बढ़ावा देने वाली स्थितियों को सुविधाजनक बनाना था, जिसका उद्देश्य अफगानिस्तान में शांतिपूर्ण और स्थिर सरकार सुनिश्चित करना था।

अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन पर टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि 'अफगानिस्तान के सबसे बड़े क्षेत्रीय विकास के भागीदार के रूप में, भारत अन्य हितधारकों के साथ समन्वय करने के लिए तैयार है ताकि अफगानिस्तान को बहुत आवश्यक मानवीय सहायता के त्वरित प्रावधान को सक्षम किया जा सके।

तिरुमूर्ति ने कहा कि 'आतंकवाद अफगानिस्तान के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों को अफगान या क्षेत्र में स्थित आतंकवादियों से किसी तरह का समर्थन नहीं मिले और इसके लिए हमें ठोस कदम उठाने होंगे। 
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