एक बार फिर वही समय आ गया है सितंबर महीने का जब पूरी दुनिया की नजरें न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पर आकर टिकती हैं। मौका होता है महासभा के वार्षिक सत्र का जिसमें विश्व के नेता जनरल डिबेट में शिरकत करने के लिए मुख्यालय पहुंचते हैं। इस साल परपंरागत रूप में देशों के प्रतिनिधियों के संबोधन के अलावा पांच अति महत्वपूर्ण सम्मेलन व उच्च स्तरीय बैठकें भी आयोजित हो रहे हैं जिनमें मौजूदा समय के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने जलवायु संकट के खिलाफ लड़ाई को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है, इसी के तहत 23 सितंबर को जलवायु कार्रवाई सम्मेलन बुलाया गया है। महासचिव ने इस सम्मेलन के जरिए जलवायु संकट का सामना करने के लिए महत्वकांक्षाओं को हवा देने और देशों द्वारा 2015 में हुए पेरिस समझौते में वैश्विक तापमान से संबंधित वादों की पूर्ति के लिए जवाबदेह ठहराना मुख्य मकसद होगा।
महासचिव ने इन सम्मेलनों के जरिए अर्थव्यवस्थाओं को जीवाश्म ईंधन से हटकर नवीकरण ऊर्जा जैसे साफ-सुथरे ईंधन स्रोतों के इस्तेमाल पर पहुंचने के लिए जोरदार माहौल बनाने की अपेक्षा भी की है, 'मैं सुनना चाहता हूं कि हम साल 2020 तक कार्बन उत्सर्जन किस तरह रोकना चाहते हैं, और कार्बन उत्सर्जन की मात्रा इस सदी के मध्य तक नेट शून्य उत्सर्जन के नाटकीय लक्ष्य तक कैसे हासिल कर सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन को अंतरराष्ट्रीय एजेंडा पर लाने में युवाओं की अहम भूमिका को पहचानते हुए 21 सितंबर को ‘यूथ क्लाइमेंट समिट’ हो रही है। यह युवा शिखर वार्ता युवा कार्यकर्ताओं, नवप्रवर्तकों (इनोवेटर) और उद्यमियों को समाधान प्रस्तुत करने के लिए एक मंच प्रदान करेगी।
पिछले चार सालों में प्रगति की बात कही गई है लेकिन गरीबी और असमानता, स्वचालन (ऑटोमेशन), जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से चुनौतियां बरकरार है जिसके मद्देनजर इस दिशा में प्रगति तेज करने के समाधान ढूंढे जाएंगे।
विकास के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने पर बैठक
किसी भी वैश्विक लक्ष्य को हासिल करने के लिए धनराशि का इंतजाम करना बेहद आवश्यक है लेकिन उसे जुटा पाना चुनौतीपूर्ण है। कर्ज का जोखिम बढ़ने और व्यापार पर पाबंदी लगने से टिकाऊ विकास के 2030 एजेंडा के लिए वित्तीय समर्थन आसान नहीं है।
विकास गतिविधियों के लिए धन का इंतजाम करने पर उच्च स्तरीय संवाद में सरकार, व्यवसायी और वित्तीय क्षेत्र के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे ताकि संसाधन और साझेदारियाँ जुटा कर प्रगति तेज की जा सके। एक अनुमान के अनुसार टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए हर क्षेत्र में हर साल पांच से सात ट्रिलियन डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने एक ऐसा माहौल तैयार करने की अपील की है जिससे टिकाऊ विकास में दीर्घकालीन निवेश को बढ़ावा दिया जाए और लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण को सुनिश्चित किया जा सके।
लघु द्वीपीय देशों के लिए समर्थन जुटाने पर बैठक
आखिरी बैठक में ‘समोआ पाथवे’ की उच्च स्तरीय समीक्षा की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी समझौते पर पांच साल पहले सहमति हुई थी जिसके जरिए लघु द्वीपीय विकासशील देशों में टिकाऊ विकास के लिए सहायता दी जाएगी।
जलवायु परिवर्तन के खतरे का सामना कर रहे देशों में सबसे ऊपर लघु द्वीपीय (small islands) देशों का स्थान आता है। उनका आकार छोटा है, वे दूर-दराज के क्षेत्रों में स्थित हैं और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
इस बैठक के जरिए जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम टालने और आर्थिक व पर्यावरण सहनशीलता के निर्माण में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी। यही विषय उसी सप्ताह हो रही अन्य चार बैठकों में भी छाया रहेगा।
सरकारों, निजी क्षेत्र, नागरिक समाज और शिक्षा जगत सहित अन्य क्षेत्रों के प्रतिनधियों से नई साझेदारियों की अपेक्षा रहेगी ताकि ‘समोआ पाथवे’ के तहत तय की गई प्राथमिकताओं को आगे बढ़ा जा सके।