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यूक्रेन संकट: महंगाई की मार पड़ी तो ब्रिटेन में गिरने लगी रूस-विरोधी प्रतिबंधों की लोकप्रियता, जानें पूरा मामला

Mon, 18 Apr 2022 08:09 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, लंदन

सार

सर्वे रिपोर्ट ने ब्रिटेन में लोगों के गिर रहे जीवन स्तर को उजागर किया है। ताजा सर्वे के दौरान 54 प्रतिशत लोगों ने कहा कि बीते एक साल में उनकी वित्तीय स्थिति बिगड़ी है। दो महीने पहले हुए एक सर्वे में ऐसा कहने वाले लोगों की संख्या सिर्फ 42 प्रतिशत थी।
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन - फोटो : twitter.com/BorisJohnson
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विस्तार
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ब्रिटेन में रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने को लेकर जन समर्थन तेजी से घट रहा है। यूक्रेन पर रूस के हमले के तुरंत बाद कड़े प्रतिबंधों को ब्रिटिश जनमत के बहुत बड़े हिस्से का समर्थन मिला था, लेकिन प्रतिबंधों के कारण ब्रिटेन और यूरोप में तेजी से बढ़ी महंगाई से प्रतिबंधों की लोकप्रियता गिरने लगी है। ब्रिटिश थिंक टैंक रेडफील्ड एंड विल्टॉन स्ट्रेटेजीज के एक ताजा सर्वे रिपोर्ट से ये बात सामने आई है।

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इस संस्था ने ये सर्वे ब्रिटिश अखबार द सेंडे टेलीग्राफ के लिए बीते हफ्ते किया। उसकी रिपोर्ट रविवार को प्रकाशित हुई। इसके मुताबिक, अब ऐसे लोगों की संख्या सिर्फ 36 प्रतिशत रह गई है, जो रूस को नुकसान पहुंचाने के लिए ईंधन की ऊंची कीमत चुकाने को तैयार हैं। मार्च में ये संख्या 50 प्रतिशत थी। एक तिहाई लोगों ने कहा कि रूसी हमले के खिलाफ यूक्रेन की मदद के लिए वे खाद्य पदार्थों और अन्य चीजों की ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार नहीं हैं।

सर्वे रिपोर्ट ने ब्रिटेन में लोगों के गिर रहे जीवन स्तर को उजागर किया है। ताजा सर्वे के दौरान 54 प्रतिशत लोगों ने कहा कि बीते एक साल में उनकी वित्तीय स्थिति बिगड़ी है। दो महीने पहले हुए एक सर्वे में ऐसा कहने वाले लोगों की संख्या सिर्फ 42 प्रतिशत थी। ताजा सर्वे में 62 फीसदी लोगों ने राय जताई कि भविष्य और ज्यादा अंधकारमय होगा। दो तिहाई लोगों ने कहा कि रोजमर्रा के खर्च में लगातार इजाफे के बावजूद उनके वेतन में कोई वृद्धि नहीं हुई है। जिन लोगों ने आमदनी बढ़ने की बात बताई, उनमें भी बड़ी संख्या ऐसे लोगों की रही, जिन्होंने कहा कि जितनी महंगाई बढ़ी है, उस अनुपात में उनकी आय नहीं बढ़ी है।
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इस रिपोर्ट के आधार लिखी अपनी टिप्पणी में द टेलीग्राफ ने कहा है कि ब्रिटिश जनता के मानस में निजी वित्तीय मुश्किलें अब यूक्रेन संबंधी चिंताओं पर भारी पड़ने लगी हैं। 24 फरवरी को यूक्रेन पर रूसी हमला होने के बाद से कच्चे तेल की कीमत 2008 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। यही हाल प्राकृतिक गैस का है। ईंधन महंगा होने के कारण परिवहन खर्च भी बढ़ गया है। इसका असर किराना और अन्य चीजों के दाम पर भी देखने को मिल रहा है।

ब्रिटिश ओटोमोटिव सर्विस कंपनी आरएसी के ईंधन संबंधी प्रवक्ता सिमोन विलियम्स ने कहा है- जहां तक पेट्रोल की कीमत की बात है, तो मार्च 2022 इतिहास के सबसे बुरे महीने के रूप में दर्ज होगा। उन्होंने कहा कि वाहन चालकों की निगाह में आगे की संभावनाएं भी उज्ज्वल नहीं हैं।

ब्रिटेन में बीते हफ्ते जारी आंकड़ों के मुताबिक मार्च की मुद्रास्फीति दर साल भर पहले की तुलना में सात प्रतिशत ज्यादा रही। 1992 के बाद देश में ऐसी महंगाई नहीं देखी गई थी। ब्रिटिश सरकार के अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि रूस पर प्रतिबंध लगाते समय उन्हें अंदाजा था कि उसका खराब असर ब्रिटेन पर भी होगा। लेकिन विदेश मंत्री लिज ट्रुस की दलील रही है कि अगर रूस यूक्रेन पर कब्जा करने में सफल हो गया, तो और भी ऊंची महंगाई का सामना करना पड़ेगा।

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