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Russia-Ukraine War: तबाही को इस तरह समझिए, लाखों शरणार्थी, हजारों हताहत और हजारों भारतीय भी वतन वापसी के इंतजार में

Thu, 03 Mar 2022 05:28 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

बहुत से लोग इस ठंड में 60 घंटों तक पोलैंड की सीमा पार करने के लिए 15 किमी तक की लंबी कतारों में प्रतीक्षा कर रहे हैं। रोमानिया में प्रवेश करने वाले 20 घंटे से ज्यादा इंतजार कर रहे हैं। लोग भूखे-प्यासे, जैसे-तैसे बच्चों और बुजर्गों को लेकर अपना घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।
 
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पोलैंड की कोर्कजोवा सीमा पर यूक्रेन से आए शरणार्थियों का मार्गदर्शन करता एक जवान। - फोटो : PTI
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विस्तार
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रूस और यूक्रेन के बीच आज युद्ध का आठवां दिन है। रूस की ओर से अभी भी ताबड़तोड़ हमले किए जा रहे हैं। रूसी सेना ने यूक्रेन की राजधानी कीव को चारो तरफ से घेर लिया है। यूक्रेनी सेना भी उनका मुकाबला कर रही है। यूक्रेन में हवाई हमले का अलर्ट जारी किया गया है। दोनों पक्षों के हजारों सैनिकों और नागरिकों की जान चली गई है। 
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जंग के बीच यूक्रेन में एक रूसी को पकड़ा गया है। दावा किया जा रहा है कि पकड़े गए सैनिक ने यह  कहा है कि उसे आम नागरिकों को मारने का भी आदेश दिया गया था। दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पास कर रूसी सेना को यूक्रेन से बाहर जाने के लिए कहा है। 

हर तरफ तबाही का मंजर
रूस के आक्रमण ने यूक्रेन के 10 से ज्यादा शहरों को तबाह कर दिया है। कई रियासशी इलाकों को बहुत नुकसान पहुंचा है और कई इमारतें खंडहर में तब्दील हो गई हैं। सड़कें सूनीं और विरान पड़ी है। यहां तक कि कई यूक्रेनी अपने घरों को छोड़कर भाग गए हैं। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक हर तरफ हताशा और भय का माहौल है। जो बच गए हैं उनके चेहरे से बेबसी झलक रही है। बमबारी से बचने के लिए हजारों लोगों ने बंकरों की शरण ली है।
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कितने देश छोड़कर चले गए?
संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि रूस के हमले के सातवें दिन तक दस लाख शरणार्थी यूक्रेन से पोलैंड और हंगरी जैसे पड़ोसी देशों में चले गए हैं।

वहीं यूरोपीय संघ का अनुमान है कि रूसी हमले के कारण 40 लाख लोग देश छोड़ने की कोशिश कर सकते हैं। शरणार्थी मुख्य तौर पर पोलैंड और हंगरी के अलावा रोमानिया, स्लोवाकिया और मोल्दोवा ही नहीं बल्कि रूस और बेलारूस भी पहुंच रहे हैं।

ब्रिटेन के प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन का कहना है कि हम 200,000 यूक्रेनी शरणार्थियों को ले सकते हैं। शरणार्थियों को गया है कि उन्हें पड़ोसी देशों में जाने के लिए दस्तावेजों की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उनके पास पासपोर्ट, उनके साथ यात्रा करने वाले बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र और चिकित्सा दस्तावेज होने चाहिए।

मोल्दोवा सीमा पर यूक्रेन के शरणार्थी - फोटो : Twitter : @sandumaiamd
लोग 60 घंटों तक कतार में खड़े हैं
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, पोलैंड ने अब तक 505,582 शरणार्थियों को शरण दी है। पोलैंड घायल यूक्रेनियन को ले जाने के लिए एक मेडिकल ट्रेन भी तैयार कर रहा है और उनके इलाज के लिए 1,230 अस्पतालों की  सूची बना ली गई है।

यूक्रेनियों के लिए हाल के वर्षों में पोलैंड उनकी पहली पंसद है। अनुमान है कि 2014 में रूस के क्रीमिया पर कब्जा करने के बाद दस लाख से अधिक यूक्रेनी वहां बस गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बहुत से लोग 60 घंटों तक पोलैंड की सीमा पार करने के लिए ठंड के मौसम में 15 किमी तक की लंबी कतारों में प्रतीक्षा कर रहे हैं। रोमानिया में प्रवेश करने वाले 20 घंटे से ज्यादा इंतजार कर रहे हैं। 

शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त, फिलिपो ग्रांडी ने ट्विटर पर लिखा ‘यूक्रेन के अंदर कई लाखों और लोगों के लिए अब बंदूकों के शांत होने का समय आ गया है, ताकि जीवन रक्षक मानवीय सहायता प्रदान की जा सके।’

यूक्रेन के तेल डिपो पर हमला - फोटो : Social media
कितने मारे गए?
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निकाय ने मंगलवार तक 536 नागरिकों के हताहत होने की पुष्टि की थी, जिसमें 136 नागरिक मारे गए, जिनमें से 13 बच्चे हैं। इसका अनुमान है कि 400 नागरिक घायल हुए हैं, उनमें 26 बच्चे हैं। हालांकि समाचार एजेंसी के अनुसार,  यूक्रेन की आपातकालीन सेवा ने बुधवार को 2,000 नागरिकों की मौत का अनुमान लगाया है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति के सैन्य सलाहकार ओलेक्सी एरेस्टोविच ने बुधवार को कहा कि यूक्रेन पर आक्रमण की शुरुआत के बाद से 7,000 से अधिक रूसी सैनिक मारे गए हैं। एरेस्टोविच ने कहा कि सैकड़ों सैनिकों को पकड़ लिया गया है। वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेस्की ने कहा है कि पिछले एक हफ्ते में रूस के 9000 के करीब सैनिक मारे हैं।
 
इस बीच, रूस ने युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार अपने हताहतों की संख्या को स्वीकार करते हुए बहुत कम आंकड़े जारी किए हैं। इसके रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को पुष्टि की कि यूक्रेन में 498 रूसी सैनिक मारे गए और 1,597 अन्य घायल हो गए हैं। न्यूज एजेंसी के मुताबिक रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि  2,870 यूक्रेनी सैनिक मारे गए हैं और लगभग 3,700 घायल हुए हैं। 
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यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्र - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कितने भारतीय फंसे हैं?
बुधवार को केरल उच्च न्यायालय में केंद्र द्वारा प्रस्तुत एक हलफनामे के अनुसार, 20,000 भारतीय नागरिकों में से जो जंग की शुरुआत में यूक्रेन में थे उनमें से 60 फीसदी छात्रों ने युद्ध प्रभावित देश की सीमा पार कर ली है। इनमें से 30 प्रतिशत भारत वापस आने में कामयाब हो गए हैं।  विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यूक्रेन छोड़ने वाले भारतीयों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। अनुमान है कि अभी तक लगभग 17,000 भारतीय नागरिक यूक्रेन की सीमाओं को छोड़ चुके हैं। हालांकि अभी भी कुछ नागरिक वहां फंसे हुए हैं जिन्हें सरकार जितनी जल्दी हो सके  वापस लाने के प्रयास कर रही है। 

भारत सरकार ने यूक्रेन में फंसे छात्रों को निकालने के लिए ऑपरेशन गंगा चलाया है। इसके तहत अब तक हजारों छात्रों को निकाला जा चुका है। भारत लगातार अपने विमान भेजकर छात्रों को निकालने की कोशिश रहा है। यूक्रेन मिशन पर पीएम नरेंद्र ने चार मंत्रियों को लगाया है जो भारतीय छात्रों को स्वदेश लाने के लिए चार पड़ोसी देशों में गए हैं।
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