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यूक्रेन संघर्ष: कौन हैं पुतिन के सबसे भरोसेमंद साथी? जंग की रणनीति कौन बना रहा है?

Thu, 03 Mar 2022 03:09 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

पुतिन के बारे में कहा जाता है कि वे बहुत कम सलाहकारों पर भरोसा करते हैं। लेकिन वे सलाहकार केवल वही हैं जो सिर्फ उनकी हां में हां मिलाते हैं। पुतिन ने जो ठान लिया, उसे बढ़िया-बढ़िया कहते हैं। 
 
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पुतिन के सलाहकार - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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रूस ने मानों यूक्रेन को तबाह करने की कसम खा ली है। रूसी सेना यूक्रेन पर पूरी तरह टूट चुकी है और ताबड़तोड़ हमले जारी है। रूसी हमले के कारण 15 लाख की आबादी वाले शहर खारकीव में तबाही का मंजर पसरा हुआ है। यूक्रेन का कहना है कि रूसी हमले के कारण पहले सात दिनों में ही 2000 से अधिक बेगुनाह नागरिकों की जान चली गई है। हालांकि अभी भी इसका सटीक आंकड़ा किसी के पास नहीं है।
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एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस हर रोज इस युद्ध पर करीब एक लाख करोड़ रुपये खर्च कर रहा है, जिससे रूस की आर्थिक स्थितियों पर पड़ सकता है। रूस के राष्ट्रपति बल्दीमिर पुतिन ने अपनी देश की आर्थिक स्थिति के लिए जोखिम पैदा कर दिया है फिर भी वे इस युद्ध को रोकने के लिए तैयार नहीं है।ऐसे में सवाल उठते हैं कि आखिर पुतिन के सलाहकार कौन हैं और कौन हैं जो इस पूरे जंग की रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं?

ठीक एक सप्ताह पहले जब रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया उससे पहले के दिनों में रूसी टीवी ने राष्ट्रपति पुतिन की 30 सदस्यीय सुरक्षा परिषद का एक सत्र प्रसारित किया था, जिसमें यह दिखाया गया कि पुतिन अपने निकटतम सलाहकारों के साथ  दूर में बैठे हुए हैं। इस बैठक में वे अपने सलाहकारों से रूस समर्थित दो अलगाववादी प्रांत दोनेत्स्क और लुहांस्क को कथित तौर पर स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने से पहले उनकी राय ले रहे थे।
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रूस के रक्षामंत्री सर्गेई शोइगु - फोटो : Social Media
सर्गेई शोइगु: रक्षा मंत्री
शोइगु लंबे समय से पुतिन के विश्वासपात्र हैं। रूसी सुरक्षा विशेषज्ञ और लेखक आंद्रेई सोलातोव का मानना है कि रक्षा मंत्री अभी भी सबसे प्रभावशाली आवाज है जिनकी बात राष्ट्रपति सुनते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस को पश्चिम के तथाकथित सैन्य खतरे से बचाने के लिए पुतिन को सलाह देते रहते हैं।

उन्हें 2014 में क्रीमिया पर रूसी कब्जे का का श्रेय दिया जाता है। वह जीआरयू सैन्य खुफिया एजेंसी के प्रभारी भी थे, जिन पर दो एजेंटों को जहर देकर मारने, 2018 में ब्रिटेन में सैलिसबरी में घातक हमला करने और 2020 में साइबेरिया के विपक्षी नेता एलेक्सी नवलनी पर घातक हमला करने के आरोप है। सशस्त्र संघर्ष के विशेषज्ञ वेरा मिरोनोवा के मुताबिक ‘शोइगु को कीव जाना है, वह रक्षा मंत्री हैं और उन्हें इसे जीतना है।’

वालेरी गेरासिमोव: उप रक्षा मंत्री 
उप रक्षा मंत्री और रूसी संघ के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ प्रमुख वालेरी गेरासिमोव का काम यूक्रेन पर आक्रमण करना और इस काम को तेजी से पूरा करना था। 1999 के चेचन युद्ध में सेना की कमान संभालने के बाद से ही वे व्लादिमीर पुतिन के सैन्य अभियानों का एक प्रमुख चेहरा रहे हैं। वे पिछले महीने बेलारूस में सैन्य अभ्यास की देखरेख करते हुए यूक्रेन के लिए सैन्य योजना बनाने में भी सबसे आगे थे। रूस के विशेषज्ञ मार्क गेलोटी के मुताबिक जनरल गेरासिमोव ने क्रीमिया पर कब्जा करने के लिए सैन्य अभियान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 

कुछ रिपोर्टों से पता चलता है कि यूक्रेन पर आक्रमण की शुरुआत में ही रूसी सेना के यूक्रेन पर हावी नहीं होने और सैनिकों के खराब मनोबल की खबरों के कारण अब उन्हें किनारे कर दिया गया है। लेकिन रूसी सुरक्षा विशेषज्ञ और लेखक आंद्रेई सोलातोव का मानना है कि पुतिन हर बटालियन को नियंत्रित नहीं कर सकते लेकिन यह काम गेरासिमोव का है। 

सर्गेई लवरोव, रूस के विदेश मंत्री - फोटो : ANI
सर्गेई नारिश्किन:  विदेशी खुफिया सेवा के प्रमुख 
सर्गेई नारिश्किन अपने अधिकांश करियर में राष्ट्रपति के साथ रहे हैं। वे 1990 के दशक में सेंट पीटर्सबर्ग में पुतिन के साथ थे। फिर 2004 में वे पुतिन के कार्यालय में और आखिर में संसद के अध्यक्ष बने। वह रूसी हिस्टोरिकल सोसाइटी के प्रमुख भी हैं और राष्ट्रपति को वैचारिक सलाह देते रहते हैं। 

जनरल निकोले पेत्रुशेव: सुरक्षा परिषद के सचिव 
वह पुतिन के वफादारों में से एक हैं, जिन्होंने 1970 के दशक से सेंट पीटर्सबर्ग में उनके साथ काम किया था।  वे राष्ट्रपति के सलाहकारों में भी गिने जाते हैं। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में रूसी राजनीति के एसोसिएट प्रोफेसर बेन नोबल का कहना है ‘पत्रुशेव सबसे तेज बाज की तरह हैं और पश्चिमी देशों को रूस का दुश्मन मानते हैं। 

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि यूक्रेन पर आक्रमण से तीन दिन पहले रूस की सुरक्षा परिषद की एक बैठक के दौरान पेत्रुशेव ने कहा कि अमेरिका का ‘मुख्य लक्ष्य’ रूस का टूटना था। बेन नोबल के मुताबिक ‘पेत्रुशेव वह जो हमेशा युद्ध की बात करते है  और यह एक ऐसी भावना है जिसमें पुतिन अपनी चरम स्थिति की ओर बढ़ गए हैं।’

एलेक्जेंडर बोर्तनिकोव:  डायरेक्टर फैडरल सिक्योरिटी सर्विस
बोर्तनिकोव पुतिन के वफादारों में एक हैं। उन्हें राष्ट्रपति का बेहद करीबी माना जाना जाता है। कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पुतिन किसी भी अन्य स्रोत से अधिक सुरक्षा सेवाओं से प्राप्त जानकारी पर भरोसा करते हैं  और इसी वजह से एलेक्जेंडर बोर्तनिकोव को पुतिन का बेहद खास माना जाता है। उन्होंने निकोलाई पेत्रुशेव के यहां से हटने के बाद एफएसबी का नेतृत्व संभाला। एफएसबी का अन्य कानून प्रवर्तन सेवाओं पर काफी प्रभाव है और यहां तक कि इसके अपने विशेष बल भी हैं।
 
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रूस की सीनेट की प्रमुख वैलेंटिना मतविएन्को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के साथ (फाइल फोटो) - फोटो : Om Birla Office
वैलेंटिना मतविएन्को: सीनेट की प्रमुख 
पुतिन की टीम में यह अकेली महिला हैं। वे पीटर्सबर्ग से पुतिन की वफादार हैं। 2014 में क्रीमिया पर कब्जा करने में भी उनकी भूमिका मानी जाती है। हालांकि उन्हें प्राथमिक निर्णय लेने वाला नहीं माना जाता है, लेकिन रूस की सुरक्षा परिषद में हर दूसरे सदस्य की तरह उसकी भूमिका सामूहिक चर्चा में हिस्सा लेने और अपनी राय देने की होती है। हाल ही में उन्होंने कहा कि यूक्रेन में रूस के सैन्य अभियान पर अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का मास्को जवाब देगा।

विक्टर जोलोटोव:  नेशनल गार्ड सर्विस के निदेशक 
राष्ट्रपति के एक पूर्व अंगरक्षक हैं और अब रूस के राष्ट्रीय रक्षक रोसगवर्डिया को चलाते हैं। जिसे छह साल पहले राष्ट्रपति पुतिन ने रोमन साम्राज्य की तरह प्रेटोरियन गार्ड की शैली में एक व्यक्तिगत सेना के रूप में बनाया था। निजी सुरक्षा गार्ड को चुनकर उनकी वफादारी सुनिश्चित की जाती है। विक्टर ने इसकी संख्या को 400,000 तक बढ़ा दिया है।

पुतिन और किसकी सुनते हैं?
प्रधान मंत्री मिखाइल मिशुस्तीन का मुख्य काम देश की अर्थव्यवस्था को बचाने का काम है, लेकिन युद्ध के मामले में उनका सीधा दखल बेहद कम है। राजनीतिक विश्लेषक येवगेनी मिनचेंको के अनुसार, मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन और रोसनेफ्ट राज्य के तेल दिग्गज इगोर सेचिन के प्रमुख भी राष्ट्रपति के करीबी हैं। अरबपति भाई बोरिस और अर्कडी रोटेनबर्ग, जो राष्ट्रपति के बचपन के दोस्त हैं और लंबे समय से पुतिन के विश्वासपात्र भी रहे हैं।
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