यूक्रेन विवाद पर चीन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अलग सुर अपनाया है। उसने यूक्रेन को दो अलगाववादी गणराज्यों को अलग देश के रूप में मान्यता देने के रूस के फैसले की निंदा करने से इनकार कर दिया है। चीन ने अपनी औपचारिक प्रतिक्रिया में सिर्फ इतना कहा कि सभी पक्षों को संयम का परिचय देना चाहिए, ताकि यूक्रेन में तनाव और ना बढ़े। चीन ने यूक्रेन में बने ताजा हालात के लिए ‘कई जटिल पहुलओं’ को जिम्मेदार ठहराया है। इसमें उसने नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) के विस्तार की कोशिशों को भी एक बताया है।
न्यूयॉर्क स्थित थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस में रिसर्च फेलॉ डेविड सैक्स ने कहा है कि रूस के ताजा कदम से चीन के लिए ‘कठिन स्थिति’ पैदा हुई है। उन्होंने टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘अंतिम पल तक चीन जोर देता रहा कि सभी पक्षों को मिंस्क समझौते का पालन करना चाहिए। जबकि व्लादिमीर पुतिन ने खुलेआम इस समझौते को फाड़ कर फेंक दिया है। इस तरह उन्होंने संकट का हल करने के चीनी प्रस्ताव की पूरी अनदेखी की है।’
डेविड सैक्स ने कहा कि भले चीन ने रूस की सार्वजनिक निंदा नहीं की है, लेकिन ज्यादा संभावना इस बात की है कि वहां अंदरूनी तौर पर रूस से दीर्घकालिक संबंध बनाने को लेकर तीखी बहस चल रही हो। उन्होंने कहा- ‘चीन रूस को जितना अधिक गले लगाएगा, अमेरिका और यूरोप का उसे उतना ही अधिक दबाव झेलना पड़ेगा। जबकि उसकी कोशिश ऐसे दबाव से बचने की है।’
चीन और रूस दूसरे देशों के अंदरूनी मामलों में दखल देने के पश्चिमी देशों के रवैये का मिल कर विरोध करते रहे हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उन्होंने साझा रुख अपनाया है। यही बात चार फरवरी को पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बीजिंग में हुई वार्ता के बाद जारी साझा बयान में भी देखने को मिली। उसमें चीन ने नाटो का और विस्तार ना करने की रूस का मांग का समर्थन किया।