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ब्रिटेन में सिख युवक की हत्या: बेटे ने किया कत्ल, मां ने छिपाया हथियार; भारत भेजने की तैयारी; क्या है मामला?

Fri, 16 Oct 2026 08:33 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, लंदन।

सार

ब्रिटेन में 18 वर्षीय हेनरी नोवाक की हत्या के मामले में विक्रम दिगवा को उम्रकैद की सजा मिली है, जबकि उसकी मां किरण कौर को हत्या में इस्तेमाल चाकू हटाने में मदद करने के लिए तीन साल की जेल हुई। किरण को समय से पहले रिहाई मिलने के बाद भारत भेजा जा सकता है। मां और बेटे, दोनों ने अपनी सजा के खिलाफ अपील की है, जिन पर पांच नवंबर को सुनवाई होनी है। किरपान को लेकर आरोपी के तर्क और पुलिस की भूमिका ने भी इस मामले को विवादों में ला दिया है।
 
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ब्रिटेन में सिख युवक की हत्या - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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ब्रिटेन में हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए सिख युवक की मां किरण कौर को भारत भेजा जा सकता है। 53 वर्षीय किरण को हत्या में इस्तेमाल चाकू हटाने में मदद करने के आरोप में तीन साल की जेल हुई थी। अब ब्रिटेन की सरकार की जेल से कैदियों को समय से पहले रिहा करने की योजना के तहत उनकी रिहाई हो सकती है। इसके बाद उन्हें भारत प्रत्यर्पित किए जाने पर विचार किया जा रहा है। वहीं, उनके बेटे विक्रम दिगवा को उम्रकैद की सजा मिली है।
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किरण कौर को किस मामले में जेल हुई थी?
किरण कौर के बेटे विक्रम दिगवा ने पिछले साल तीन दिसंबर को ब्रिटेन के साउथेम्प्टन में 18 वर्षीय हेनरी नोवाक की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। किरण पर हत्या में इस्तेमाल हथियार को हटाने में मदद करने का आरोप था। अदालत ने जुलाई में उन्हें इस मामले में तीन साल की जेल की सजा सुनाई। अदालत में न्यायाधीश ने कहा कि एक जिम्मेदार माता-पिता अपने बच्चे को उसके गलत काम के लिए टोकते और उसे सही रास्ते पर चलने के लिए कहते। इसके बजाय किरण चाकू को घर ले गईं और उसे अपने बेटे के कमरे में रखे अन्य धार्मिक और दूसरे हथियारों के साथ रख दिया।

बेटे विक्रम दिगवा को कितनी सजा मिली?
23 वर्षीय विक्रम दिगवा को जून में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। उसे पैरोल के लिए पात्र होने से पहले कम से कम 21 साल जेल में बिताने होंगे। हालांकि, उसने अपनी सजा को चुनौती दी है और उसे अपील करने की अनुमति मिल गई है। उसकी अपील पर पांच नवंबर को ब्रिटेन की कोर्ट ऑफ अपील में सुनवाई होनी है। किरण कौर ने भी अपनी सजा के खिलाफ अपील दायर की है। उनकी अपील पर भी उसी दिन सुनवाई निर्धारित है।
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किरण कौर को भारत क्यों भेजा जा सकता है?
ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने कहा है कि सरकार विदेशी अपराधियों को जल्द से जल्द देश से बाहर भेजने की कोशिश करती है। आम तौर पर 12 महीने या उससे अधिक की जेल की सजा पाने वाले विदेशी नागरिकों को प्रत्यर्पण के लिए विचाराधीन रखा जाता है। हालांकि, इसके कुछ अपवाद भी हैं और संबंधित व्यक्ति फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है। किरण भारतीय नागरिक हैं और उन्हें जेल व्यवस्था पर दबाव कम करने के लिए बनाई गई सरकारी योजना के तहत समय से पहले रिहाई मिल सकती है। इसके बाद उन्हें भारत भेजे जाने की संभावना है। गृह मंत्रालय ने इस मामले का नाम लेकर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन कहा कि हेनरी नोवाक की हत्या से उनके परिवार और दोस्तों को जो नुकसान हुआ, उसके प्रति उसकी संवेदनाएं हैं।

हत्या के मामले में किरपान को लेकर विवाद क्यों हुआ?
मामले में आरोपी ने कथित तौर पर आत्मरक्षा के लिए धार्मिक आधार का हवाला देते हुए कहा था कि इस्तेमाल किया गया हथियार किरपान था। सिख धर्म में किरपान आस्था का प्रतीक है और ब्रिटेन में इसे रखने के लिए कानूनी छूट है। हालांकि, मामले की सुनवाई के दौरान ब्रिटिश सिख संगठनों और सांसदों ने किरपान को गलत तरीके से पेश किए जाने की आलोचना की और कहा कि इस मामले में धर्म के आधार पर किसी तरह की छूट या औचित्य लागू नहीं होता।

न्यायाधीश विलियम मौस्ले ने किरण को सजा सुनाते हुए कहा कि किरपान सिख धर्म में आस्था का प्रतीक है और इसे हमला करने के उद्देश्य से नहीं रखा जाना चाहिए। इस घटना के बाद साउथेम्प्टन और हैम्पशायर तथा आइल ऑफ वाइट में सामुदायिक तनाव पैदा हुआ। पुलिस की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस के बॉडी-वॉर्न कैमरे के फुटेज में हेनरी नोवाक को अधिकारियों द्वारा हथकड़ी लगाते हुए देखा गया था। उस समय विक्रम ने उन पर नस्लभेदी व्यवहार का आरोप लगाया था, जिसे बाद में अदालत में गलत पाया गया। इस मामले में पुलिस की कथित दोहरी नीति के आरोपों की स्वतंत्र जांच भी चल रही है।
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