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UK: अगले साल आम चुनाव से पहले मतदाताओं को लुभाने में जुटी लेबर पार्टी, भारतीय कंपनियों के योगदान की तारीफ की

Tue, 05 Sep 2023 06:11 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

UK: विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास मामलों के छाया राज्य सचिव डेविड लैमी ने सोमवार शाम यहां 'कनेक्टिंग कम्युनिटीज' समारोह की मेजबानी की। इस दौरान उन्होंने ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में भारतीय व्यवसाओं द्वारा किए गए योगदान को 'बड़ी सफलता की कहानी' बताया। 
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डेविड लैमी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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ब्रिटेन में अगले साल आम चुनाव होने हैं। इससे पहले विपक्षी लेबर पार्टी मतदाताओं को लुभाने के प्रयास में जुट गई है। इसी कड़ी में उसने भारत जैसे देशों में भेजे जाने वाले धन (रेमिटेंस) पर लगने वाले छिपे हुए शुल्क पर लगाम लगाने का संकल्प लिया है।

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विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास मामलों के छाया राज्य सचिव डेविड लैमी ने सोमवार शाम यहां 'कनेक्टिंग कम्युनिटीज' समारोह की मेजबानी की। इस दौरान उन्होंने ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में भारतीय व्यवसाओं द्वारा किए गए योगदान को 'बड़ी सफलता की कहानी' बताया। 

इस समारोह में महिलाओं और समानता के लिए छाया सचिव लेबर पार्टी की अध्यक्ष एनेलीज डोड्स भी मौजूद थीं, जिन्होंने व्यापार, कला, संस्कृति, भोजन, संगीत  और सामुदायिक जुड़ाव में प्रवासी समुदायों के योगदान पर प्रकाश डाला। 

लैमी ने कहा, टोरी विभाजनकारी सांस्कृतिक युद्धों में समुदायों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अगली लेबर सरकार देश और विदेश में ब्रिटेन के विविध समुदायों के योगदान को महत्व देगी। 

उन्होंने कहा, प्रवासी समुदायों द्वारा भेजे गए धन से गरीबी और असमानता से लड़ने में प्रवासी समुदायों के सकारात्मक प्रभावों को अक्सर अनदेखा किया जाता है। इन भुगतानों पर महंगी छिपी हुई फीस ने ब्रिटेन में परिवारों पर वित्तीय दबाव डाला, जो पहले से ही जीवन यापन के लिए संघर्ष कर रहे थे। 

ब्रिटेन से जो धन लोगों के द्वारा अपने देशों में दोस्तों-परिवारों को भेजा जाता है, उसे यहां अंतरराष्ट्रीय हस्तांतरण (इंटरनेशनल ट्रांसफर) के रूप में परिभाषित किया जाता है। विश्व बैंक के अनुमान के मुताबिक, 2022 में  इन भुगतानों का कुल मूल्य 10.7 अरब अमेरिकी डॉलर था। लेबर पार्टी के मुताबिक, छिपी हुई फीस पर सालाना लगभग आधा अरब पाउंड खर्च होने का अनुमान है, जो पहले से ही जीवनयापन की लागत के संकट से जूझ रहे ब्रिटेन में परिवारों पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है।
 
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उन्होंने कहा, 'अब हम ऐसे चरण में हैं जहां एक हजार से अधिक भारतीय कंपनियां ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में एक अरब से अधिक का योगदान दे रही हैं। यह एक बड़ी सफलता की कहानी है। अगर मुझे विदेश सचिव के रूप में सेवा करने का अवसर मिलता है, तो मैं व्यापार और उद्यम के अलावा प्रेषण (रेमिटेंस) से जुड़े मुद्दों को संबोधित करना चाहूंगा।'
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