ये लोग दशकों से साम्राज्यवादी व्यवस्था का विरोध करते आ रहे हैं। एलिजाबेथ की मौत उनके लिए एक मौका है, जब वे आवाज उठाकर अपनी बात हमवतनों और सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
ब्रिटेन फिलहाल एक सम्राज्ञी के जाने और नए सम्राट के तख्तनशीं होने के दौर से गुजर रहा है। इन्हीं लोगों के बीच हजारों लोग ऐसे भी हैं, जो न तो एलिजाबेथ की मौत से दुखी हैं, न चार्ल्स के राजा बनने से खुश। इन्हें ब्रिटेन में साम्राज्य विरोधी लोग कहा जा रहा है।
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ये लोग दशकों से साम्राज्यवादी व्यवस्था का विरोध करते आ रहे हैं। एलिजाबेथ की मौत उनके लिए एक मौका है, जब वे आवाज उठाकर अपनी बात हमवतनों और सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। लेकिन, लंदन की पुलिस पार्लियामेंट स्क्वायर पर जुटे प्रदर्शनकारियों को चुन-चुनकर जेल में ठूंस रही है।
पुलिस के मनमाने और क्रूर रवैये की ब्रिटेन के कई संभ्रांत लोगों ने आलोचना भी है। पुलिस जितने साम्राज्य विरोधी लोगों को गिरफ्तार कर रही है, उससे कई गुना ज्यादा लोग हाथों में 'नॉट माई किंग' लिखी तख्तियां लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। नागरिक अधिकार समूह लिबर्टी ने पुलिस कार्रवाई पर चिंता जताई है।
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शोक में डूबा भारतीय समुदाय...वेस्टमिंस्टर हॉल में भारतीय समुदाय समेत हजारों लोग यहां दिवंगत महारानी को श्रद्धांजलि देने आ रहे हैं। ब्रिटिश भारतीय कारोबारी लॉर्ड करन बिलिमोरिया ने कहा, ‘हम शोक में हैं।’
59 करोड़ की ‘शाही’ सुरक्षा में होगा महारानी का अंतिम संस्कार
दिवंगत महारानी का अंतिम संस्कार भी 'शाही' सुरक्षा में होगा। 19 सितंबर को कड़े पहरे और चाकचौबंद व्यवस्था पर 75 लाख डॉलर यानी करीब 59 करोड़ रुपये खर्चे जाएंगे।
इस बीच, ब्रिटिश संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमन्स के अध्यक्ष सर लिंडसे हॉयल ने चीनी सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल को संसद परिसर में दिवंगत महारानी के ‘लाइंग-इन-स्टेट’ कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति नहीं दी है।