फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्या ट्रंप के दबाव का पड़ा असर?: ब्रिटेन ने ईरान के प्रॉक्सी नेटवर्क पर लगाया प्रतिबंध, बताई ये वजह

Tue, 12 May 2026 11:53 AM IST
अमन तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

ब्रिटेन ने ब्रिटिश धरती पर आपराधिक गिरोहों के जरिए खतरा पैदा करने और पश्चिम एशिया में अस्थिरता फैलाने के आरोप में ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। इसमें कई वित्तीय संस्थानों और व्यक्तियों की संपत्ति फ्रीज की गई है। इसका उद्देश्य अवैध फंडिंग रोकना और वैश्विक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
विज्ञापन
ब्रिटेन - फोटो : Adobestock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ब्रिटेन ने अपनी धरती पर शत्रुतापूर्ण गतिविधियों और आपराधिक गिरोहों (प्रॉक्सी) के इस्तेमाल के खिलाफ ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। सोमवार को विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (FCDO) ने कई ईरानी संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ इन उपायों की घोषणा की। यह कार्रवाई वैश्विक सुरक्षा को खतरे में डालने और विदेशों में धमकियां देने के लिए आपराधिक गिरोहों का उपयोग करने के जवाब में की गई है।
विज्ञापन


प्रतिबंधों का क्या है उद्देश्य?
इन प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य उस अवैध धन के प्रवाह को रोकना है, जिसकी मदद से ईरानी शासन पश्चिम एशिया में अस्थिरता फैला रहा है। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी भी शामिल है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है। इसके अलावा, खाड़ी देशों में ब्रिटेन के सहयोगियों पर होने वाले सैन्य हमलों को रोकने के लिए भी यह कदम उठाया गया है।

क्या यह कार्रवाई किंग चार्ल्स की अमेरिका यात्रा का असर?
माना जा रहा है कि ब्रिटेन की यह कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दबाव का नतीजा है। हाल ही में किंग चार्ल्स की अमेरिका यात्रा खत्म हुई है। जानकारों का मानना है कि इस यात्रा के दौरान ट्रंप और किंग चार्ल्स के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हुई। इसी बातचीत के बाद ब्रिटेन ने ईरान के खिलाफ यह सख्त रुख अपनाया है।
विज्ञापन


क्या बोले ब्रिटिश विदेश सचिव?
ब्रिटिश विदेश सचिव यवेट कूपर ने कहा कि यह कार्रवाई उन संगठनों और लोगों को निशाना बनाती है जो ब्रिटेन की सड़कों पर सुरक्षा और मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए खतरा पैदा करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरानी शासन के समर्थन वाले आपराधिक गिरोहों और अवैध वित्तीय नेटवर्क को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ब्रिटेन इनके लिए पूरे यूरोप के साथ तालमेल बिठा रहा है। उन्होंने मध्य पूर्व में कूटनीतिक समाधान और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता बहाल करने पर भी जोर दिया।

ये भी पढ़ें: ईरान युद्ध से पस्त पाकिस्तान: पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए बढ़ाई सख्ती, जनता के सामने गिड़गिड़ाई शहबाज सरकार

किन पर लगा प्रतिबंध?
नए प्रतिबंधों के तहत संदिग्ध आपराधिक गिरोहों को ब्रिटेन आने से रोका जाएगा और उनकी अवैध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने वाली संपत्ति को जब्त किया जाएगा। जिन संस्थाओं पर संपत्ति फ्रीज करने और निदेशक के रूप में काम करने पर रोक लगाई गई है, उनमें 'बेरेलियन एक्सचेंज', 'जीसीएम एक्सचेंज' और 'जिंदाश्ती नेटवर्क' शामिल हैं।

प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची में मंसूर जरिनघलम, नासिर जरिनघलम, एकरेम अब्दुलकरीम ओजटुनक, निहात अब्दुल कादिर असन, रजा हमीदीरावरी और नामिक सालिफोव के नाम हैं। इन लोगों पर यात्रा प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ उनकी संपत्ति भी फ्रीज कर दी गई है।
विज्ञापन


FCDO के अनुसार, यह कदम यूरोपीय संघ (EU) की कार्रवाई के साथ मेल खाता है। ब्रिटेन इससे पहले भी ईरानी शासन पर 550 से अधिक प्रतिबंध लगा चुका है। इनमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) और मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े 90 से अधिक प्रतिबंध शामिल हैं।

अन्य वीडियो-
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें