सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को फैसला सुनाया कि शरण के लिए शरणार्थियों के आवेदन पर कार्रवाई होने तक उन्हें रवांडा निर्वासित करने की ब्रिटेन सरकार की नीति गैरकानूनी है।
देश की शीर्ष अदालत ने एक अपीलीय अदालत के इस फैसले पर सहमति जताई कि इस बात को मानने के पर्याप्त आधार हैं कि निर्वासित किए गए लोगों को रवांडा की सरकार बाद में उन जगहों पर भेज सकती है, जहां वे सुरक्षित नहीं रह पाएंगे।
हाल ही में बर्खास्त की गई गृहमंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने एक पत्र लिखकर इस तरह के फैसले के लिए प्रधानमंत्री ऋषि सुनक को जिम्मेदार ठहराया था। ब्रेवरमैन ने दावा किया था कि वह अवैध प्रवास के मुद्दे से निपटने के लिए 'किसी भी तरह का विश्वसनीय प्लान बी तैयार करने में विफल' रहे हैं।
बाद में सुनक ने भी माना कि नौकाओं को रोकने के वादे के तहत सरकार यह परिणाम नहीं चाहती थी, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वह इस तरह की स्थिति के लिए तैयार थे।
उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, हम गृहमंत्री की इस दलील को स्वीकार करते हैं कि रवांडा की सरकार ने सद्भावना के साथ समझौता किया था। लेकिन इसके बावजूद हमसे अगर पूछा जाए कि क्या निर्वासित लोगों को वास्तविक जोखिम होने की बात मानने का पर्याप्त आधार है तो हमने कहा है कि हां ऐसा है।
यह अपील ब्रेवरमैन के नेतृत्व वाले गृह मंत्रालय ने अपीलीय अदालत का फैसला सरकार के खिलाफ जाने के बाद दायर की थी। अब यह उनके उत्तराधिकारी गृह सचिव जेम्स क्लेवरली होंगे, जो आगे सरकार की प्रतिक्रिया और रणनीति तैयार करने के लिए जिम्मेदार होंगे।