भगोड़े आतंकी दाऊद इब्राहिम का आपराधिक सहयोगी व पाकिस्तानी मूल का नागरिक मोती उर्फ जाबिर सिद्दीकी बृहस्पतिवार को लंदन में प्रत्यर्पण की लड़ाई हार गया। उसे नशीले पदार्थों की तस्करी के मामले में अमेरिका भेजा जाना था, जिसके खिलाफ उसने अपील की थी।
मामले पर जज जॉन जानी ने अपने आदेश में साफ किया कि अब मोती को अमेरिका भेजने में कोई रोक नहीं है। 53 साल का मोती अंतरराष्ट्रीय आतंकी दाऊदी इब्राहिम के गिरोह का प्रमुख सदस्य रहा है। वहीं नवंबर में अदालत ने कहा था कि मोती उस व्यक्ति का आपराधिक सहयोगी रहा है, जो भारत में बम धमाकों सहित कई जघन्य अपराध अंजाम दे चुका है।
ताजा आदेश में जज ने उसकी फाइल देश के सचिव को भेजने के लिए कहा है। इस पर यूके की गृह सचिव प्रीति पटेल को हस्ताक्षर करने होंगे, जिसके दो महीने के भीतर प्रत्यर्पण प्रक्रिया पूरी की जाएगी। संभावना है कि इस बीच मोती हाईकोर्ट में अपील कर सकता है।
उसके वकीलों को आशंका है कि अमेरिका में उस पर आतंक के मामले भी चलाए जा सकते हैं, जिसमें उम्र कैद की सजा हो सकती है। इसीलिए उसने मानवाधिकार का सहारा लेकर राहत मांगी थी, लेकिन अदालत ने कहा कि उसके प्रत्यर्पण से किसी मानवाधिकार का हनन नहीं होता।
अमेरिका ने यूके को भेजी प्रत्यर्पण अर्जी में कहा था कि 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में वांछित आतंकी दाऊद के साथ मोती सीधे संपर्क में था। उसे काला धन सफेद करने और नशीले पदार्थों की तस्करी में स्कॉटलैंड यार्ड ने अगस्त 2018 में दबोचा था।