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ब्रिटेन में जंक फूड के विज्ञापनों पर रोक: बच्चों में बढ़ते मोटापे को रोकने के लिए नया नियम लागू; यह है लक्ष्य

Mon, 05 Jan 2026 09:45 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन।

सार

ब्रिटेन ने बच्चों में बढ़ते मोटापे को रोकने के लिए टीवी पर रात नौ बजे से पहले और ऑनलाइन हर समय जंक फूड के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार के अनुसार, इससे बच्चों के भोजन से हर साल 7.2 अरब कैलोरी कम होंगी और करीब 20 हजार बच्चों को मोटापे से राहत मिलेगी।
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जंक फूड (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
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ब्रिटेन सरकार ने बच्चों में बढ़ते मोटापे को रोकने के लिए सोमवार से एक नया नियम लागू किया है। इसके तहत टीवी पर रात नौ बजे से पहले जंक फूड के विज्ञापन और ऑनलाइन हर समय ऐसे विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
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स्वास्थ्य और सामाजिक देखभाल विभाग (डीएचएससी) ने कहा कि कम पोषण वाले खाद्य पदार्थों और मीठे पेयों के विज्ञापनों पर रोक से हर साल बच्चों के आहार से करीब 7.2 अरब कैलोरी कम होने की उम्मीद है। इससे मोटापे से जूझ रहे बच्चों की संख्या में लगभग 20 हजार की कमी आने और समय के साथ सरकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) को करीब दो अरब पाउंड का लाभ होने की संभावना है।

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ब्रिटेन की स्वास्थ्य मंत्री एशले डाल्टन ने कहा कि रात नौ बजे से पहले जंक फूड के विज्ञापनों को सीमित करके और ऑनलाइन भुगतान वाले विज्ञापनों पर रोक लगाकर बच्चों और अभिभावकों को अस्वास्थ्यकर भोजन के अत्यधिक प्रभाव से बचाया जा सकता है, जिससे स्वस्थ विकल्प अपनाना आसान होगा।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य बीमारियों का इलाज करने के बजाय उन्हें रोकने पर जोर देना है, ताकि लोग स्वस्थ जीवन जी सकें और जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) उनके लिए उपलब्ध रह सके।

डीएचएससी का कहना है कि प्रमाण बताते हैं कि विज्ञापन बच्चों के खाने की आदतों को प्रभावित करते हैं। ये कम उम्र से ही उनकी पसंद तय करते हैं और मोटापे व उससे जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इंग्लैंड में प्राथमिक स्कूल शुरू करते समय 22.1 फीसदी बच्चे अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त होते हैं और स्कूल छोड़ते समय यह आंकड़ा बढ़कर 35.8 फीसदी हो जाता है। वहीं, ब्रिटेन में दांतों में सड़न पांच से नौ वर्ष के बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने का सबसे बड़ा कारण है।

यूके ओबेसिटी हेल्थ अलायंस की कार्यकारी निदेशक कैथरीन जेनर ने कहा कि ये नए प्रतिबंध बच्चों को सबसे हानिकारक विज्ञापनों से बचाने में मदद करेंगे और स्वस्थ भोजन के माहौल की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अब तक की सबसे स्वस्थ पीढ़ी तैयार करना है और मोटापे से जुड़ी बीमारियों को रोकने के लिए यह नीति व्यापक प्रयासों का अहम हिस्सा है। समय के साथ नियमों को और मजबूत करना जरूरी होगा, ताकि ये सुरक्षा उपाय प्रभावी बने रहें।

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खाद्य और पेय कंपनियों को इस प्रतिबंध की पहले ही जानकारी दे दी गई थी, क्योंकि अक्तूबर 2025 से ये नियम स्वैच्छिक रूप से लागू किए गए थे और इस सप्ताह से इन्हें कानूनी रूप से लागू कर दिया गया है।

डीएचएससी ने कहा कि पहले किए गए उपायों से कंपनियों ने अपने उत्पादों को अधिक स्वास्थ्यकर बनाने की दिशा में बदलाव किया था। आज लागू हुए नए कदमों का भी ऐसा ही असर दिख रहा है और इससे स्वास्थ्यकर विकल्पों के विकास और प्रचार को बढ़ावा मिला है।

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