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UHNRC: पाकिस्तान में कानून का शासन गंभीर खतरे में, हिंसा और नेताओं की गिरफ्तारियां चिंता का विषय

Fri, 26 May 2023 03:17 AM IST
वीरेंद्र शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा

सार

सैन्य अदालतों में नागरिक मामले अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन हैं और 9 मई की घटनाओं की तत्काल, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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संयुक्त राष्ट्र - फोटो : youtube
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विस्तार
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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने कहा कि पाकिस्तान में हिंसा और गिरफ्तारियों में वृद्धि गंभीर चिंता का विषय है। तुर्क ने जिनेवा में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, मनमाने कानूनों के तहत की गई गिरफ्तारियां मनमानी हिरासत के बराबर हैं। सैन्य अदालतों में नागरिक मामले अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन हैं और 9 मई की घटनाओं की तत्काल, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा कि पाकिस्तान में कानून का शासन गंभीर खतरे में है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और समृद्ध पाकिस्तान का एकमात्र रास्ता मानवाधिकारों, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और कानून के शासन की सुरक्षा में निहित है।
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वोल्कर तुर्क ने कहा कि विशेष रूप से परेशान करने वाली रिपोर्टें हैं कि पाकिस्तान नागरिकों पर मुकदमा चलाने के लिए सैन्य अदालतों के उपयोग को फिर से शुरू करने का इरादा रखता है, जो उसके अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के दायित्वों का उल्लंघन करेगा। उन्होंने पाकिस्तान के अधिकारियों से 9 मई के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई मौतों और चोटिल हुए लोगों की त्वरित, निष्पक्ष, पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने आगे कहा, सुरक्षित और समृद्ध पाकिस्तान का एकमात्र मार्ग वह है जो समाज के सभी क्षेत्रों की सार्थक एवं मुक्त भागीदारी के साथ मानवाधिकारों, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और कानून के शासन के लिए प्रशस्त हो।


पाकिस्तान में नौ मई को यह हुई थी हिंसा
पाकिस्तान सरकार के आदेश पर नौ मई को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद पीटीआई कार्यकर्ताओं ने जिन्ना हाउस, मियांवाली एयरबेस, आईएसआई भवन सहित एक दर्जन सैन्य प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ की थी। रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय पर भी भीड़ ने हमला किया था। पुलिस के अनुसार, हिंसा में करीब 10 लोगों की मौत हुई थी। वहीं पीटीआई का दावा है कि सुरक्षाबलों की फायरिंग में उनके पार्टी के करीब 40 लोगों की मौत हो गई। सुरक्षाबलों ने इसके बाद कई पीटीआई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया, जिनमें कई पूर्व मंत्री भी शामिल थे।
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