Defence Minister Rajnath Singh meeting with US Defence Secretary Mark Esper
- फोटो : ANI
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि भारत और अमेरिका रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं वहीं औद्योगिक सुरक्षा अनुलग्नक (आईएसए) सह-निर्माण और सह-उत्पादन के लिए आवश्यक ढांचागत जरूरतों को पूरा करेगा। सिंह ने मजबूत प्रतिरक्षा को भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश अपने बीच वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक गहरा करने तथा इसका और विस्तार करने के लिए काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि टू प्लस टू वार्ता ने राजनयिक और सुरक्षा नीतियों में तालमेल को और बेहतर बनाया है। दोनों देशों ने उच्च स्तर पर संबंधों को और गहरा करने का एक समझदार फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि नवंबर 2019 में अमेरिका और भारत की तीनों रक्षा सेवाओं के बीच हुआ अभ्यास ‘एक्सरसाइज टाइगर ट्रिम्फ’ इसी का उदाहरण है। बीते कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच कोमकासा (सीओएमसीएएसए) और लेमोआ (एलईएमओए) समेत कई महत्वपूर्ण रक्षा समझौते हुए हैं।
रक्षा मंत्री ने टू प्लस टू वार्ता के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इसमें उन्होंने कहा, ‘बीते कुछ वर्षों में हमने हथियार अधिग्रहण में विविधता लाने और स्वदेशीकरण करने का फैसला किया है। इससे अमेरिका के साथ रक्षा कारोबार बढ़ा है, यह इसका एक महत्वपूर्ण पहलू है।’
उन्होंने कहा, ‘हम भारत और अमेरिका के बीच, रक्षा उत्पादन क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाने के लिए भी काम कर रहे हैं। अमेरिका के साथ आईएसए समझौता होने से रक्षा उत्पादन केंद्र में सह-निर्माण और सह-उत्पादन संपर्क बनाने की खातिर आवश्यक ढांचा प्राप्त हो सकेगा।’ सिंह ने कहा कि हमें उम्मीद है कि इससे गोपनीय प्रोद्यौगिकी तथा जानकारी का सुगम हस्तांतरण संभव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि इससे मेक इन इंडिया और भारत में दो रक्षा उत्पादन गलियारों जैसी सरकार की महत्वपूर्ण पहलों का महत्व भी और बढ़ जाएगा।
सिंह ने कहा कि भारत ने अमेरिकी कंपनियों को मेक इन इंडिया के तहत भारत में और निवेश के लिए आमंत्रित किया है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष टू प्लस टू वार्ता में जो लक्ष्य निर्धारित किए गए थे, दोनों देशों ने उन्हें प्राप्त कर लिया है। इसमें उनके तथा अमेरिकी रक्षा मंत्री के बीच हॉटलाइन स्थापित करना, पहला त्रि-सेवा अभ्यास, रक्षा नीति समूह वार्ता आदि शामिल हैं।
पाकिस्तान का भारत विरोधी हिंसा को बढ़ावा देना शांति के लिए ठीक नहीं
वहीं राजनाथ सिंह ने बुधवार को अमेरिकी नेतृत्व से कहा कि पाकिस्तान का शीर्ष नेतृत्व की ओर से अत्यधिक बयानबाजी और शत्रुतापूर्ण वक्तव्य दिए जा रहे हैं और भारत विरोधी हिंसा को बढ़ावा देना शांति के लिए ठीक नहीं है।
राजनाथ सिंह तथा विदेश मंत्री एस जयशंकर की अमेरिकी समकक्षों रक्षा मंत्री मार्क एस्पर तथा विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के साथ टू प्लस टू मंत्री स्तरीय वार्ता का यहां समापन हो गया। पाकिस्तान से उत्पन्न होने वाले सीमापार आतंकवाद का मुद्दा भी इस दौरान उठा।
वार्ता के समापन पर राजनाथ ने संवाददाताओं से कहा कि हमने बताया है कि पाकिस्तान बहुत अधिक बयानबाजी कर रहा है और शत्रुतापूर्ण वक्तव्य दे रहा है। पाकिस्तानी नेताओं द्वारा भारत विरोधी हिंसा को बढ़ावा देना शांति के लिए हितकर नहीं है।
सिंह ने बताया कि बैठक के दौरान उन्होंने अफगानिस्तान, पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका और हिंद महासागर क्षेत्र में हालात के बारे में अपना-अपना आकलन साझा किया। संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में पोम्पियो ने पाकिस्तान की ओर से होने वाले सीमापार आतंकवाद के बारे में बात की।
अफगानिस्तान में अमेरिका की ओर से हाल में की गई शांति वार्ताओं के बारे में एक सवाल पर पोम्पियो ने कहा कि हम भारत की चिंताओं को समझते हैं, पाकिस्तान की ओर से पनपने वाले आतंकवाद के बारे में चिंताएं सही हैं और हम भरोसा दिलाते हैं कि हम इस पर विचार करेंगे।
अमेरिकी नेताओं ने भारतीय नेताओं को अफगानिस्तान मुद्दे पर जानकारी दी। पोम्पियो ने कहा कि आतंकवाद के खतरे से अमेरिकी जनता की रक्षा करने और भारत जैसे अपने महान लोकतांत्रिक मित्रों के साथ भारतीयों की रक्षा करने के लिए मिलकर काम करने का हमारा दृढ़ संकल्प है।
जयशंकर ने बताया कि वार्ता में आतंकवाद-निरोधक प्रयासों पर बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में आतंकी खतरों की प्रकृति, सीमापार आतंकवाद तथा आतंकी पनाहगाहों के खतरों पर बन रही आम सहमति से आतंकवाद-निरोधी प्रयासों को बल मिला है। उन्होंने कहा कि इस दौरान इन चुनौतियों से निपटने के उपायों के बारे में भी चर्चा हुई।