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अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र में मानव के रुकने के दो दशक कल होंगे पूरे, आईएससी में आए कई बदलाव

Sun, 01 Nov 2020 03:58 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, केप कैनेवरेल।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (आईएससी) पिछले 20 वर्षों से पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगा रहा है। इसमें मनुष्यों के ठहरने के 20 साल सोमवार को पूरे होंगे। हालांकि, इस केंद्र पर पहुंचने के लिए तीन अंतरिक्ष यात्रियों के दल ने दो दिन पहले 31 अक्तूबर, 2000 को ही उड़ान भरी थी।

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इस केंद्र की स्थापना के बाद पहली बार इसमें रहने गए अंतरिक्ष यात्रियों के लिए वहां तंग, नमी युक्त छोटे तीन कमरे थे। पिछले 20 सालों में 241 यात्रियों का स्वागत करने वाले इस आईएससी ने कई बदलाव देखे हैं। अब यह टावर सा लगने वाला जटिल ढांचा बन गया है, जिसमें तीन शौचालय, सोने के छह कम्पार्टमेंट और 12 कमरे हैं। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र में अब तक 19 देशों के अंतरिक्ष यात्रियों को रहने का मौका मिला है।


इनमें कई बार मरम्मत कार्य के लिए जाने वाले अंतरिक्ष यात्री और अपने खर्च पर वहां जाने वाले पर्यटक शामिल हैं। आईएससी पर सबसे पहले अमेरिका के बिल शेफर्ड और रूस के सर्जेइ क्रिक्लेव और यूरी गिडजेन्को गए थे। इन्होंने कजाखिस्तान से 31 अक्तूबर, 2000 को यात्रा शुरू की थी और दो बाद दो नवंबर, 2000 को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र का दरवाजा खोला था। वे आईएससी के रूप में विज्ञान के नए युग की शुरुआत कर रहे थे, एकजुटता प्रकट करने के लिए एक दूसरे का हाथ थामे हुए थे।
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अमेरिकी नौसेना के सील कमांडर 71 वर्षीय शेफर्ड ने स्टेशन कमांडर की भूमिका निभाई। तीनों शुरुआती अंतरिक्ष यात्रियों ने अपना अधिकतर समय आज के मुकाबले कहीं कठिन परिस्थितियों में उपकरणों को ठीक करने और उन्हें लगाने में बिताया। उन दिनों का याद करते हुए क्रिक्लेव ने कहा कि नए अंतरिक्ष केंद्र में मशीनों को लगाने और मरम्मत करने में घंटों का समय लगा, जबकि वहीं काम धरती पर मिनटों में हो जाता है।

अपने सहयात्री के साथ हाल में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा आयोजित चर्चा में शामिल शेफर्ड ने कहा कि हर दिन अपने आप में चुनौती लेकर आता था। वर्ष 2000 के मुकाबले अंतरिक्ष केंद्र में बहुत बदलाव आए हैं और अब इसका आकार फुटबॉल मैदान के बराबर है, इसमें 13 किलोमीटर लंबी बिजली के तार लगे हुए हैं, सौर पैनल का आकार करीब एक एकड़ है और इसमें तीन प्रयोगशालाएं हैं।

शेफर्ड ने कहा कि यह 500 टन का ढांचा अंतरिक्ष में घूमता है, जिसके अधिकतर हिस्से वहां पर एक साथ जोड़ने तक कभी साथ नहीं आए और आज 20 साल बाद भी इसमें कोई बड़ी समस्या नहीं आई है। अंतरिक्ष केंद्र के पहले यात्रियों ने दो नवंबर, 2002 को वहां पहुंचने के दिनों को याद करते हुए कहा कि हमने सबसे पहले आईएससी की बत्ती जलाई थी, वह बहुत यादगार पल था, जिसके बाद हमने पीने के लिए पानी गर्म किया और शौचालय को चालू किया।

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