दुनिया भर के शेयर बाजारों में मची उथल-पुथल के बीच निवेशक शेयरों, बॉन्ड, क्रिप्टोकरेंसी आदि सबकी बिकवाली कर रहे हैं। इस उथल-पुथल को अब ग्रेट मार्केट क्रैक-अप 2022 के नाम से जाना जा रहा है। बढ़ती महंगाई और बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कामकाजी तबकों के लिए यह तय करना मुश्किल हो गया है कि अब कहां निवेश करना सुरक्षित है। अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि कोरोना महामारी के दौरान अमेरिका सरकार ने अपने नागरिकों को जो आर्थिक मदद की, वहीं अब अर्थव्यवस्था की मुसीबत बन गया है। तब दी गई नकदी सहायता से अर्थव्यवस्था में मांग कायम रखने में कामयाबी मिली। लेकिन तब उदारता से बाजार में डाली नकदी मुद्रास्फीति का भी कारण बनी।
वेबसाइट एक्सियोस.कॉम के विश्लेषक ब्रैडी डेल ने एक टिप्पणी में लिखा है कि क्रिप्टो का मार्केट अभी भी नया है। इसमें निवेश के बारे में अनुमान लगाना लगातार मुश्किल बना हुआ है। इस हफ्ते गुरुवार को क्रिप्टोकरेंसियों के भाव में औसतन 20 फीसदी की गिरावट आई। सबसे ज्यादा हैरत की बात इसे माना गया है कि स्टेबल कॉइन कहे जाने वालीं क्रिप्टोकरेंसियों का भाव भी मुंह के बल गिरा है। स्टेबल कॉइन उन क्रिप्टोकरेंसियों को कहा जाता है, जिनका भाव डॉलर से जुड़ा होता है।
वेबसाइट यूरो न्यूज के मुताबिक क्रिप्टोकरेंसियों के भाव में आई गिरावट से यूरोपीय निवेशकों को अरबों यूरो का नुकसान हुआ है। क्रिप्टो प्रोजेक्ट- टेरा से जुड़ी दो स्टेबल कॉइंस के भाव औंधे मुंह गिरे। इसकी तुलना लीमैन ब्रदर्स के ध्वस्त होने से की गई है। अमेरिका में इन्वेस्टमेंट बैंक लीमैन ब्रदर्स के ध्वस्त होने के साथ ही वहां 2008 की मंदी की शुरुआत हो गई थी।
अमेरिका की वित्त मंत्री जेनेट येलेन ने इसी हफ्ते टेरा यूएसडी नाम के स्टेबल कॉइन का जिक्र करते हुए कहा है कि अनियमित क्रिप्टोकरेंसी बाजार वित्तीय स्थिरता के लिए खतरा हैं। उन्होंने सीनेट की बैंकिंग समिति के सामने अपनी गवाही में कहा- ‘टेरा यूएडी नाम के एक स्टेबल कॉइन का भाव तेजी से चढ़ा और फिर गिर गया। इससे यह आम बात जाहिर हुई है कि यह एक तेजी से फैल रही चीज है, जो वित्तीय स्थिरता के लिए खतरा है। इस स्थिति को ठीक करने का नियमों का ढांचा बनाना होगा।’