अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत चीन और रूस के गठबंधन के और करीब चला गया है। वॉशिंगटन की ओर से इस ओर कम ध्यान देना एक अनावश्यक नुकसान है। यह बात व्हाइट हाउस के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को कही।
ट्रंप प्रशासन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) रहे जॉन बोल्टन ने यह टिप्पणी उस समय की है, जब अलास्का के एंकोरेज शहर में शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के बीच बैठक होने जा रही है। यह बैठक तीन साल से जारी यूक्रेन युद्ध के लिए स्थायी युद्धविराम की संभावना पर बातचीत के लिए हो रही है।
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बोल्टन ने एक्स पर लिखा, ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने पर भारत पर टैरिफ लगाए, लेकिन चीन पर नहीं लगाए जो रूस से काफी ज्यादा तेल खरीदता है, तो इससे भारत को शायद चीन-रूस के गठबंधन की ओर धकेल दिया गया। ट्रंप प्रशासन की यह रणनीतिक चूक अनावश्यक गलती है।
रूस से तेल खरीदने पर ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाए हैं, जिससे कुल टैरिफ फीसदी हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका ने चीन पर ऐसा कोई टैरिफ नहीं लगाया है, जबकि वह भारत की तुलना में कहीं ज्यादा रूसी तेल खरीदता है। सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में बोल्टन ने कहा कि व्हाइट हाउस ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों जैसे भारत पर द्वितीयक टैरिफ लगाए हैं। भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाए गए हैं, लेकिन ये अभी लागू नहीं हुए हैं। लेकिन भारत में इस पर काफी नाराजगी है, खासकर तब जब चीन पर ऐसा कोई टैरिफ नहीं लगाया है, जबकि वह रूस से बहुत ज्यादा तेल और गैस खरीदता है। भारतीय इस पर बहुत नाराज हैं।
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बोल्टन ने पुतिन की भारत यात्रा की संभावना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा की ओर भी इशारा किया, जो 2018 के बाद पहली बार हो रही है। उन्होंने कहा, स्पष्ट है कि मॉस्को और बीजिंग दोनों ही भारत को अपने करीब लाने की कोशिश करेंगे। यह अमेरिका के लिए नकारात्मक परिणाम ला सकता है, क्योंकि यह फैसला बिना विचार-विमर्श के लिया गया था।
पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन से फोन पर बात की। प्रधानमंत्री ने उन्हें इस साल के अंत में भारत आने का निमंत्रण दिया है। यहयात्रा 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के तहत होगी। पीएम मोदी के इस महीने के अंत में चीन जाने की संभावना है। वह 31 अगस्त से एक सितंबर के बीच तियानजिन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। यह यात्रा सात साल बाद होगी।