राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वित्तीय लेनदेन और लगातार बढ़ती निजी संपत्ति एक बार फिर वैश्विक बहस का विषय बन गई है। सामने आई जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति पद संभालने के बाद ट्रंप की कुल संपत्ति में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। इस तेज उछाल के पीछे क्रिप्टोकरेंसी (डिजिटल मुद्रा) में निवेश और विदेशी बाजारों से हुई कमाई को प्रमुख वजह माना जा रहा है।
कितनी बढ़ी ट्रंप की संपत्ति?
फोर्ब्स की अरबपतियों की आधिकारिक सूची के अनुसार, वर्ष 2017 में डोनाल्ड ट्रंप की कुल संपत्ति 3.5 अरब डॉलर (करीब 29,225 करोड़ रुपये) थी। वहीं, मार्च 2026 में जारी फोर्ब्स के ताजा मूल्यांकन के मुताबिक उनकी संपत्ति बढ़कर 6.5 अरब डॉलर (करीब 62,917.5 करोड़ रुपये) पहुंच गई। यानी छह वर्षों में उनकी संपत्ति में लगभग तीन अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई।
क्रिप्टो कारोबार से कितनी हुई कमाई?
जून 2026 में जारी ट्रंप की 927 पन्नों की अनिवार्य सरकारी वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने पिछले एक वर्ष में केवल क्रिप्टो से जुड़े कारोबार और निवेश के जरिए ही 1.4 अरब डॉलर से अधिक की आय अर्जित की। रिपोर्ट से यह संकेत मिलता है कि डिजिटल परिसंपत्तियों में उनके निवेश ने उनकी कुल संपत्ति बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
क्या राष्ट्रपति पद और कारोबारी हितों के टकराव पर उठे सवाल?
रिपोर्ट में विस्तार से यह विश्लेषण किया गया है कि ट्रंप की संपत्ति में आई यह अप्रत्याशित बढ़ोतरी केवल बाजार की सामान्य तेजी और उनकी कारोबारी समझ का परिणाम है या फिर राष्ट्रपति के रूप में लिए गए फैसलों और सरकारी नीतियों का भी इसमें कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव रहा है। इसी वजह से उनके वित्तीय हितों और संवैधानिक जिम्मेदारियों के बीच संभावित टकराव को लेकर बहस तेज हो गई है।
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जनता की चिंता क्यों बढ़ रही है?
रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद अमेरिका के साउथ जर्सी, कंबरलैंड और केप मे काउंटी समेत कई इलाकों के मतदाताओं ने इस मुद्दे पर चिंता जताई है। आलोचकों का कहना है कि सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के निजी वित्तीय हितों और सरकारी निर्णयों के बीच पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।