अमेरिका के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि ट्रंप प्रशासन ने एक न्यायालय के फैसले को ताक पर रखते हुए अप्रवासियों को अल सल्वाडोर भेजने की प्रक्रिया जारी रखा है। जहां एक कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को अप्रवासियों को भेजने की प्रक्रिया पर रोक लगाने का आदेश दिया था।
रविवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा अमेरिका से सैकड़ों अप्रवासियों को अल सल्वाडोर भेज दिया। जबकि एक संघीय न्यायाधीश ने वेनेजुएला के गिरोह के सदस्यों को निर्वासित करने पर अस्थायी रोक लगाने का आदेश दिया। हालांकि, यह आदेश जारी होने के दौरान दो विमान पहले से हवा में थे, एक अल सल्वाडोर और दूसरा होंडुरास की ओर जा रहा था।
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एक जज ने निर्वासन पर रोक का दिया था आदेश
यूएस डिस्ट्रिक्ट जज जेम्स ई बोसबर्ग ने शनिवार को निर्वासन पर रोक का आदेश दिया था, लेकिन वकीलों ने बताया कि दोनों विमान पहले से उड़ चुके थे और इस आदेश के बावजूद वे वापस नहीं किए गए। अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायब बुकेले ने इस फैसले पर सोशल मीडिया पर टिप्पणी की और कहा कि बहुत देर हो चुकी है।
ट्रंप प्रशासन ने किया विदेशी शत्रु अधिनियम का उपयोग
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बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने 1798 के विदेशी शत्रु अधिनियम का उपयोग करते हुए अप्रवासियों को निर्वासित किया था, जो अमेरिकी इतिहास में केवल तीन बार लागू हुआ है। इसको लेकर अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (एसीएलयू) ने कहा कि वे जानना चाहते हैं कि क्या इस फैसले को अदालत की अवहेलना माना जा सकता है।
हालांकी अप्रवासियों को अल सल्वाडोर भेजे जाने के बाद एक वीडियो में उन्हें पुलिस और सैन्य सुरक्षा के बीच कुख्यात सीईसीओटी जेल में भेजे जाते हुए दिखाया गया। इन लोगों को जेल में डालने से पहले उनकी बुरी हालत दिखायी गई, जैसे उनकी टखनों और हाथों में बेड़ियां और सिर झुका कर चलने के लिए कहा गया। इस घटनाक्रम के दौरान, वेनेजुएला की सरकार ने इस निर्णय की आलोचना करते हुए इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया और ट्रंप के फैसले को अत्याचारों से जोड़ा।