यमन सरकार और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष विराम की मियाद नहीं बढ़ने पर भारत ने गहरी निराशा जताई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई दूत रुचिरा कंबोज ने कहा कि भारत यमन की एकता और संघर्षग्रस्त देश के लोगों के प्रति एकजुटता प्रकट करता है।
कंबोज ने यमन पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में यह बात कही। यह बैठक गुरुवार को हुई थी। कंबोज ने कहा कि यह बहुत निराशाजनक है कि युद्धरत गुटों के बीच संघर्ष विराम की मियाद बढ़ाने के लिए सहमति नहीं बनी। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और ईरानी समर्थित हौथी विद्रोहियों के बीच एक संघर्ष विराम 2 अक्टूबर को समाप्त हो गया है।
यूएन में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने इस पर कहा कि भारत यह जानकर बहुत निराश है कि संबंधित पक्ष युद्धविराम के और विस्तार के लिए सहमत नहीं हुए। संघर्ष का एकमात्र टिकाऊ समाधान शांतिपूर्वक बातचीत और राजनीतिक हल है। इससे यमन के लोगों की आकांक्षा पूरी होगी और खुशहाली आएगी।
यमन सरकार की पहल का स्वागत
कंबोज ने कहा कि यमन सरकार ने भरोसे के साथ संघर्ष विराम समझौतों को लागू किया था। सरकार की प्रतिबद्धता का स्वागत करते हुए कंबोज ने कहा कि यह समय युद्धरत पक्षों के लिए मानव-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने का है, न कि इसे केवल एक सैन्य या राजनीतिक खेल के रूप में देखने का।
कंबोज ने कहा कि संघर्ष विराम के लिए विशेष दूत के जरिए बातचीत चल रही है। हमें उम्मीद है कि जल्द ही एक संतोषजनक समझौता हो जाएगा। भारत ने विशेष दूत द्वारा किए गए प्रस्तावों पर यमनी सरकार द्वारा दिखाए गए लचीलेपन की भी सराहना की है। इसके साथ ही हूती विद्रोहियों से समझौते के लिए रचनात्मक रुख अपनाने का आग्रह किया। इस बीच, भारत ने सभी पक्षों से आग्रह किया है कि वे शांति बनाए रखें और भड़काने वाली कार्रवाई या सैन्य कार्रवाई से बचें। संघर्ष के कारण पहले ही जानमाल की भारी हानि हो चुकी है। लाखों लोग खाद्यान्न असुरक्षा से जूझ रहे हैं।
यूएन महासचिव गुतेरस ने भी संघर्ष विराम की अपील
उधर, यूएन महासचिव एंतोनियो गुतेरस ने भी यमन के युद्धरत पक्षों से न केवल युद्धविराम समझौते को नए सिरे से लागू करने बल्कि उसके विस्तार की अपील की है। गुतेरस ने बीते दिनों कहा था कि 2014 में यमन में शुरू हुए गृह युद्ध के बाद देश में शांति बनाए रखने में इस समझौते ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
2014 में हूती विद्रोहियों ने कर लिया था उत्तरी यमन पर कब्जा
यमन में 2014 में हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना समेत देश के उत्तरी इलाकों पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद देश में भीषण गृह युद्ध की शुरुआत हुई थी। इसके कारण यमन सरकार को निर्वासित घोषित कर दिया गया था। इसके बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना ने 2015 में यमन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को बहाल करने की कोशिश शुरू की थी।
डेढ़ लाख से ज्यादा मारे गए
यमन में हुए संघर्ष में 150,000 से अधिक लोग मारे गए थे। इनमें 14,500 आम नागरिक थे। इसके बाद दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में दो अप्रैल को मुस्लिम पवित्र महीने रमजान की शुरुआत के साथ ही दो महीने के लिए युद्धविराम समझौते को स्वीकार कर लिया था। इसके बाद संघर्ष विराम समझौते की अवधि दो बार बढ़ाई जा चुकी है, लेकिन विस्तारित मियाद इसी माह दो अक्तूबर को खत्म हो गई।