फ्रांस में सुरक्षा बलों की तरफ से राजनीतिक बयानबाजी का सिलसिला थम नहीं रहा है। अब देश के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी ने बयान जारी कर उन पूर्व सैन्य और पुलिस अधिकारियों की कड़ी आलोचना की है, जिन्होंने देश में गृह युद्ध की चेतावनी दी थी। देश के सर्वोच्च पुलिस अधिकारी फ्रेडरिक वियो ने एक ऑनलाइन याचिका के जरिए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को खुला पत्र लिख कर गृह युद्ध की चेतावनी देने वाले अधिकारियों को याद दिलाया कि वे सार्वजनिक रूप से कुछ कहते समय संयम बरतने के लिए कानूनन बाध्य हैं। इस ऑनलाइन अर्जी के समर्थन में लगभग 40 हजार लोगों ने अपने दस्तखत किए हैं।
वियो ने अपनी अर्जी में लिखा है कि राष्ट्रपति को पत्र लिखने वाले पूर्व अधिकारियों का इरादा चाहे जो हो, उनके इस कदम से देश की संस्थाएं कमजोर होंगी। उन्होंने कहा कि इस वक्त पहले के किसी समय की तुलना में फ्रांस की पुलिस को अधिक आत्मविश्वास, एकता और समरसता की जरूरत है। जरूरत इस बात की है कि पुलिसकर्मी पक्षपात का रुख छोड़ कर काम करें। वियो ने ध्यान दिलाया कि सरकार ने पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और उन्हें हथियार और उपकरण उपलब्ध कराने की दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं।
इसके पहले लिखे गए खुले पत्र में कुछ वर्तमान और पूर्व सुरक्षा अधिकारियों ने राष्ट्रपति से कहा था कि नकाबपोश गुटों के हमलों से पुलिस कर्मियों को बचाने के लिए वे कदम उठाएं। उन्होंने कहा था कि सुरक्षा और सार्वजनिक शांति के लिहाज से इस समय फ्रांस गहरे संकट से गुजर रहा है। राष्ट्रपति, सरकार और सांसदों को इस स्थिति को खत्म करने के लिए हर संभव कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों पर हमले फ्रांस के ‘गणराज्यीय मूल्यों, परंपरा और सामाजिक ढांचे’ पर हमला हैं। ये पत्र एरिक मेसोन नाम के एक पुलिस अधिकारी की हत्या के तुरंत बाद लिखा गया था। मेसन की हत्या उस समय हुई, जब उन्होंने दक्षिण शहर अविगॉन में नशीली दवाओं के कारोबारियों पर छापा मारा था।
पत्र लेखक सुरक्षा अधिकारियों ने पत्र में कहा था कि हथियारबंद और नकाबपोश गुट देश में निर्भयता के साथ फैलते जा रहे हैं और उनकी वजह से देश अलग-अलग टुकड़ों में बंट गया है। उन्होंने सरकार से कहा था कि इसे देखते हुए पुलिस को सामग्रियों, मनोबल और कानून से मजबूत करने की जरूरत है, ताकि बिना जान को जोखिम में डाले पुलिस कर्मी अपना कर्त्तव्य निभा सकें।
फ्रेडरिक वियो ने इसी पत्र के जवाब में ऑनलाइन अर्जी की मुहिम चलाई है। गौरतलब है कि इन पूर्व सुरक्षा अधिकारियों से पहले एक हजार से ज्यादा पूर्व सैन्य अधिकारियों और जवानों ने भी राष्ट्रपति मैक्रों के नाम एक खुला पत्र लिखा था। उसमें 25 पूर्व जनरल भी शामिल थे। उस पत्र में देश को विखंडित होने से रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग की गई थी। उस पत्र पर दस्तखत करने वाले पूर्व अधिकारियों और सैनिकों ने बाकायदा अपने नाम दर्ज कराए थे। लेकिन दूसरे पत्र के लेखकों ने अपने नाम नहीं लिखे। इस पत्र को युवा पीढ़ी के जवानों की तरफ से लिखा गया पत्र बताया गया। उसमें कहा गया कि फ्रांस एक नाकाम राज्य (फेल्ड स्टेट) होता जा रहा है। उस पत्र के वेब पेज को 24 लाख लोगों ने पढ़ा और दो लाख 87 हजार से अधिक लोगों ने उसमें लिखी गई बातों के प्रति अपना समर्थन जताया था।
राष्ट्रपति के नाम लिखे दोनों पत्रों का समर्थन धुर दक्षिणपंथी नेशनल रैली पार्टी की नेता मेरी ली पेन भी किया। लेकिन सशस्त्र सेनाओं के वर्तमान प्रमुख फ्रांक्वां लिकोइत्र ने पत्र लेखकों से कहा था कि सैनिक और पुलिस कर्मी सार्वजनिक रूप से राजनीतिक बयान नहीं दे सकते। इसलिए जिन वर्तमान कर्मयों ने उस पर दस्तखत किए हैं, उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।