ओमनी डिजाइन के सह-संस्थापक, अध्यक्ष और सीईओ कुश गुलाटी ने कहा कि सेमीकंडक्टर पर आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स का दायरा बढ़ता जा रहा है। यह प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स के भविष्य की रीढ़ है।
सिलिकॉन वैली के सफल भारतीय-अमेरिकी उद्यमी कुश गुलाटी ने मंगलवार को कहा है सेमीकंडक्टर्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए भारत को ऐसी कंपनियों की जरूरत है, जो इस क्षेत्र में बौद्धिक संपदा की मालिक हों। गुलाटी ने कहा कि सेमीकंडक्टर उद्योग वैश्विक शक्तियों के लिए युद्ध का नया मैदान बनकर उभरा है।
विज्ञापन
प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स के भविष्य की रीढ़
ओमनी डिजाइन के सह-संस्थापक, अध्यक्ष और सीईओ कुश गुलाटी ने कहा कि सेमीकंडक्टर पर आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स का दायरा बढ़ता जा रहा है। यह प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स के भविष्य की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, क्वांटम कंप्यूटिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स से लेकर हाथ के मोबाइल, घडी तक हर जगह सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में भारत को वैश्विक शक्तियों के बीच अपनी जगह बनाने पर ध्यान देना होगा।
भारतवंशी उद्यमी गुलाटी ने कहा-बौद्धिक संपदा पर नियंत्रण पूरी तरह से अलग
गुलाटी कहते हैं कि सेमीकंडक्टर का उत्पादन अलग बात है, जबकि इसका डिजाइन तैयार करने की क्षमता और बौद्धिक संपदा पर नियंत्रण रखना पूरी तरह से अलग है। भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग आकार ले रहा है। लेकिन, ज्यादातर मामलों में बौद्धिक संपदा अधिकार भारत से बाहर की कंपनियों के नियंत्रण में है। गुलाटी ने कहा कि आज भारत में तमाम इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाए जा रहे हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर का बौद्धिक संपदा स्वामित्व भारत या भारतीय कंपनियों के पास नहीं है। विनिर्माण क्षेत्र में भी फैब्स भारत के बाहर हैं। अगर इन क्षेत्रों में निवेश करता है, तो यह भारत के लिए शानदार शुरूआत होगी।