एक महीने में तीन खालिस्तानी आतंकी मारे गए: पाकिस्तान-कनाडा से भारत में फैलाते थे आतंक, समझें सबकुछ
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Tue, 20 Jun 2023 05:15 PM IST
सार
सवाल उठ रहा है कि आखिर इन आतंकियों को कौन मार रहा है? क्या अब खालिस्तान का अंत नजदीक आ चुका है? आइए समझते हैं...
खालिस्तानी आतंकी मारे गए
- फोटो : अमर उजाला
भारत समेत दुनिया के कई देशों में इन दिनों खालिस्तानी आतंकियों का आतंक बढ़ गया है। आतंकियों ने भारत विरोधी गतिविधियों को तेज कर दिया है। पिछले दिनों खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल के जरिए भी भारत में दंगा भड़काने की साजिश हुई थी। भारत में अशांति फैलाने की चाहत रखने वाले यही खालिस्तानी आतंकवादी अब एक-एक करके मारे जा रहे हैं। पिछले एक महीने के अंदर पाकिस्तान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा से भारत विरोधी ऑपरेशन चलाने वाले तीन आतंकी मारे जा चुके हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इन आतंकियों को कौन मार रहा है? क्या अब खालिस्तान का अंत नजदीक आ चुका है? आइए समझते हैं...
खालिस्तानी आतंकी मारे गए
- फोटो : अमर उजाला
भारत समेत दुनिया के कई देशों में इन दिनों खालिस्तानी आतंकियों का आतंक बढ़ गया है। आतंकियों ने भारत विरोधी गतिविधियों को तेज कर दिया है। पिछले दिनों खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल के जरिए भी भारत में दंगा भड़काने की साजिश हुई थी। भारत में अशांति फैलाने की चाहत रखने वाले यही खालिस्तानी आतंकवादी अब एक-एक करके मारे जा रहे हैं। पिछले एक महीने के अंदर पाकिस्तान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा से भारत विरोधी ऑपरेशन चलाने वाले तीन आतंकी मारे जा चुके हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इन आतंकियों को कौन मार रहा है? क्या अब खालिस्तान का अंत नजदीक आ चुका है? आइए समझते हैं...
पहले जानिए कौन-कौन आतंकी अब तक ढेर हो चुके हैं?
1. हरदीप सिंह निज्जर : खालिस्तान टाइगर फोर्स का प्रमुख रहा हरदीप सिंह निज्जर कनाडा से भारत के खिलाफ ऑपरेशन चलाता था। रविवार शाम को गुरुद्वारा साहिब परिसर में ही दो अज्ञात हमलावरों ने हरदीप सिंह निज्जर को गोलियों से भून दिया। निज्जर भारत के जालंधर का रहने वाला था। 46 साल का निज्जर भारत के खिलाफ खालिस्तान समर्थक युवाओं को ट्रेनिंग दिलवाता था। इसके अलावा खालिस्तान की मांग को लेकर वह पाकिस्तान और भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले देशों से फंड जुटाता था। हरदीप भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में शामिल था। साल 2018 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कनाडा का दौरा किया था। उस दौरान उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री को खालिस्तानी मोस्ट वॉन्टेड अपराधियों की सूची सौंपी थी। इसमें हरदीप सिंह निज्जर का नाम भी शामिल था।
2. अवतार सिंह खांडा : वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल की मदद करने वाला अवतार सिंह खांडा भी मर चुका है। पिछले ही हफ्ते ब्रिटेन के एक अस्पताल में उसकी मौत हुई। अवतार की मौत को लेकर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है। कुछ लोगों का दावा है कि उसे जहर देकर मारा गया है। मौत का कारण फूड पॉइजनिंग बताया जा रहा है। हालांकि, कुछ रिपोर्ट के अनुसार, उसे ब्लड कैंसर था। अवतार सिंह भारत के सिख युवाओं को देश के खिलाफ भड़काता था। पिछले दिनों भारत के कुछ सिख गायकों ने लंदन में उससे मुलाकात भी की थी।
3. परमजीत सिंह पंजवड़ : खालिस्तान कमांडो फोर्स का प्रमुख और कुख्यात आतंकी परमजीत सिंह पंजवड़ भी मारा जा चुका है। सात मई को पाकिस्तान के लाहौर में किसी ने उसकी हत्या कर दी। पंजवड़ के पीछे पिछले 30 साल से भारत की कई एजेंसियां पड़ी थीं। खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) के प्रमुख परमजीत सिंह पंजवड़ उन कुछ उग्रवादी नेताओं में से था, जिसने 1990 के दशक के दौरान पंजाब में उग्रवाद की रीढ़ बनाई थी। उसने पंजाब में खालिस्तान के समर्थन की लहर जागृत कर दी थी। परमजीत सिंह पंजवड़ उग्रवादियों में शामिल होने से पहले केंद्रीय सहकारी बैंक में काम करता था। केसीएफ के पूर्व प्रमुख सुखदेव सिंह सुखा उर्फ जनरल लाभ सिंह पंजवड़ भी उसी गांव का था और उनके परिवार से संबंध हैं। पंजवड़ के विद्रोही बनने के लिए लाभ सिंह मुख्य स्रोत था। उसको देखकर बैंक में काम करने वाला एक साधारण सा आदमी देश का मोस्ट वांटेड आतंकी बन गया।
तरनतारन जिले के पंजवार गांव में जन्मा परमजीत सिंह पंजवड़ 60 साल का था। यह गांव भारत-पाकिस्तान सीमा से ज्यादा दूर नहीं है। आतंकवाद के दौरान पंजवड़ अक्सर चोरी-छिपे पाकिस्तान जाया करता था। वह पंजाब में बैठे-बैठे पाकिस्तान के साथ मिलकर देश की शांति को भंग कर रहा था।
इन आतंकियों को कौन मार रहा है?
इसे समझने के लिए हमने रक्षा मामलों के जानकार कर्नल (रिटायर्ड) अरुण साहा से बात की। उन्होंने कहा, 'देश के बाहर रहने वाले आतंकवादियों की मौत रहस्यमयी तरीके से हुई है। आतंकवादियों के भी दुश्मन होते हैं। संभव है कि इन्हें भी इनके ही लोगों ने मार दिया हो।'
साहा के अनुसार, 'इन आतंकियों का खत्म होना भारत के लिए अच्छी खबर है। ये जिंदा रहते हुए भारत में खालिस्तान की पकड़ और मजबूत बनाने में जुट गए थे। जिस खालिस्तानी जड़ों को इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के समय खत्म किया जा चुका था, उसे ये फिर से जिंदा करने की कोशिश करने लगे थे। इसके पीछे पाकिस्तान और चीन का हाथ भी है। ये दोनों देश भारत में स्थिरता नहीं चाहते हैं। यही कारण है कि बड़े पैमाने पर इन खालिस्तानी आतंकियों को फंड मिलता है।'
तो क्या अब खालिस्तानी खत्म हो जाएंगे?
यही सवाल हमने कर्नल अरुण से पूछा। उन्होंने कहा, 'ये कहना अभी जल्दबाजी होगी। हालांकि, भारत सरकार ने कई ठोस कदम जरूर उठाए हैं। हमारी एजेंसियां खालिस्तानी आतंकियों को लेकर सतर्क है और जरूरी कदम उठा रही है। ये जरूर है कि आने वाले दिनों में खालिस्तानी मूवमेंट अब के मुकाबले कमजोर जरूर पड़ जाएगा।'
कर्नल अरुण ने कहा, 'खालिस्तान के जो समर्थक भारत में रहते हैं, उनके खिलाफ तो सरकार सीधे कार्रवाई कर सकती है, लेकिन बाहर रहने वालों पर शिकंजा कसना आसान नहीं होता है। ऐसे में सरकार कूटनीतिक तरीके से भी इसपर काम कर रही है। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका जैसे देशों के साथ मिलकर सरकार इस दिशा में काम कर रही है।'