अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा है कि ऐसा कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है जो सऊदी के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को खशोगी की हत्या से जोड़े। सऊदी को अमेरिकी समर्थन की बात को पोम्पियो ने दोहराया।
उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि वह खशोगी की मौत से संबंधित सभी तरह की खुफिया रिपोर्ट पढ़ चुके हैं। उन्हें किसी भी तरह से नहीं लग रहा कि इस हत्या में सऊदी प्रिंस का हाथ है। उन्होंने कहा कि "यह एक महत्वपूर्ण बयान है, यह एक ऐसा बयान है जिसकी हम घोषणा कर रहे हैं।"
जब पोम्पियो से पूछा गया कि केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआईए) को पूरा विश्वास है कि खशोगी की हत्या मामले में सऊदी प्रिंस का ही हाथ है, तो उन्होंने (पोम्पियो) कहा, "मैं खुफिया एजेंसी के मामले में कुछ नहीं कहना चाहता।"
सीआईए की घोषणा के बाद बीते महीने पोम्पियो ने कहा था कि सऊदी अरब अमेरिका के लिए अहम सहयोगी है। वह अमेरिका के लिए ईरान पर नियंत्रण रखने, इराक के लोकतंत्र को बचाने और इस्लामिक संगठन और अन्य समूहों से लड़ने के लिए बेहद जरूरी है।
बता दें सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस के आलोचक और अमेरिका में रह रहे खशोगी की हत्या को लेकर दुनिया भर में सऊदी अरब और उसके शासकों के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी। लेकिन ट्रंप ने भी सऊदी के साथ खड़े रहने की बात कही है।
इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि सऊदी अरब के साथ रणनीतिक संबंध बनाए रखना और तेल की वैश्विक कीमतों पर लगाम लगाए रखना अमेरिका के सर्वश्रेष्ठ हित में है। ट्रंप ने सऊदी के साथ खड़े रहने की बात कही थी। ट्रंप ने कहा था कि अगर अमेरिका सऊदी से रिश्ते खत्म कर देगा तो चीन और रूस फायदा उठा लेंगे।
ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा था, ‘‘ऐसा इसलिए क्योंकि मेरे लिए अमेरिका पहले आता है।’’ उन्होंने कहा कि खशोगी की हत्या के बावजूद अमेरिका अपने हित साधने और उस क्षेत्र में मौजूद इजराइल तथा अन्य सहयोगियों के हितों के लिए सऊदी अरब का मित्र बना रहेगा। ट्रंप ने कहा था, "हमारा महत्वपूर्ण लक्ष्य पूरी दुनिया से आतंकवाद के खतरे को खत्म करना है।" वहीं सऊदी अरब के विदेश मंत्री अदेल अल-जुबेर भी इस बात को मान चुके हैं कि पत्रकार खशोगी की हत्या "एक गलती और दुष्ट ऑपरेशन" था।