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कोरोना संबंधित सही जानकारी प्राप्त करने में एआई तकनीक है बेहद महत्वपूर्ण, जानिए इसकी भूमिका

Sun, 13 Sep 2020 02:02 AM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
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पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का कहर लगातार जारी है। अभी तक 2.88 करोड़ से अधिक लोग इस महामारी से संक्रमित हो चुके हैं और 9 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस महामारी पर जल्द से जल्द काबू पाने के लिए कई देशों के वैज्ञानिक अपने स्तर पर विभिन्न तरह के शोध कर रहे हैं लेकिन इस शोध की आड़ में सोशल मीडिया और ऑनलाइन वेबसाइट पर भ्रमित करने वाली सूचनाएं भी फैलाई जा रही हैं। 

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कई लोग इस महामारी से उबरने के लिए इंटरनेट पर सर्च कर रहे हैं लेकिन लोगों के लिए इन सूचनाओं के अंबार में गलत और सही का अंतर करना मुश्किल हो रहा है। लोग निर्णय नहीं कर पा रहे हैं कि कौन सा तथ्य सही है और कौन सा गलत।

अमेरिकी एआई विशेषज्ञों के अनुसार इस महामारी के कारण कुछ अविश्वसनीय स्रोतों द्वारा गलत सूचनाएं भी फैलाई जा रही है जिससे लोगों के बीच काल्पनिक और वास्तविक जानकारियों में अंतर करना मुश्किल हो रहा है।
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एआई विशेषज्ञों का कहना है कि एआई तकनीक द्वारा सूचनाओं के अंबार से तो निपटा जा सकता है लेकिन सही तथ्यों को गलत सूचनाओं से अलग करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। 

विशेषज्ञों के अनुसार अगस्त के मध्य तक, Covid-19 या SARS-CoV-2 शब्दों वाले 8,000 से अधिक वैज्ञानिक कागजात ऑनलाइन चिकित्सा, जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान अभिलेखागार में पोस्ट किए गए थे।लेकिन इतनी अधिक संख्या में सामग्री होने के कारण लोग भ्रमित हो रहे हैं।  

विशेषज्ञों  ने कहा कि एआई तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग करने से सही जानकारी को प्राप्त किया जा सकता है। इस तकनीक के द्वारा सही तथ्यों एवं विश्वसनीय शोधों को एकत्रित कर सही जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

इसके द्वारा सम्मानित वैज्ञानिक प्रकाशनों को भी अधिक सुलभ बनाया जा सकता है और गलत जानकारी फैलाने पर कानूनी रूप से जवाबदेह होने के लिए मजबूर किया जा सकता है।

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