हैरिस ने अपनी यात्रा के दौरान चीन की बढ़ती ताकत को नियंत्रित करने पर अपना ध्यान केंद्रित रखा। इस संबंध में वैश्विक व्यापार को प्रोत्साहित करने वाले संगठन हिनरिच फाउंडेशन के सीनियर रिसर्च फेलॉ स्टीफन ओलसन का कहना है कि अमेरिका और चीन दोनों आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन) को अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र के रूप में देखते हैं। उन्होंने वेबसाइट एशिया टाइम्स से कहा- ऐसे में इस क्षेत्र के देश इस होड़ का फायदा उठाते हुए उन दोनों से बेहतर सौदेबाजी करने में लगे हुए हैं।
ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी में शोधकर्ता हंटर मार्स्टन ने राय जताई है कि अमेरिका ने काफी समय से दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ अपना संबंध मजबूत करने की योजना बनाई हुई है। लेकिन इस पर अमल करने में उसने काफी समय गंवाया है। जो बाइडन ने इस क्षेत्र के लिए अपने राजदूतों की नियुक्ति में काफी समय लगा दिया। इस क्षेत्र के किसी देश के नेता के साथ उन्होंने निजी संवाद कायम नहीं किया है।
मार्स्टन ने कहा- ‘बाइडेन प्रशासन मानता है कि चीन के साथ प्रतिस्पर्धा का केंद्रीय इलाका यही क्षेत्र है। लेकिन उच्च स्तर पर यहां ध्यान केंद्रित करने या राष्ट्रपति बाइडन के बिना निजी यात्रा के यह शक बना रहेगा कि बाइडन प्रशासन जो कहता है, क्या उसके प्रति वह सचमुच वचनबद्ध है।’