एक तरफ जहां पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन से होने वाली ताबाही से परेशान दिख रही है वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने पेरिस जलवायु समझौते से खुद को अलग करके दुनिया को एक आघात सा मारा है। जिसकी भरपाई शायद ही कभी हो पाएगी। अमेरिका ने ऐतिहासिक पेरिस समझौते से अलग होने की घोषणा औपचारिक रुप से संयुक्त राष्ट्र को दे दी है। इस समझौते से अलग होने की प्रक्रिया सोमवार से शुरु हो गई है। अब अमेरिका चार नवंबर 2020 को इस समझौते से अलग हो जाएगा।
गौरतलब है कि यह समझौता 12 दिसंबर 2015 को हुआ था। इस वैश्विक समझौते में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अमेरिका ने 22 अप्रैल 2016 को पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और तीन सितंबर 2016 को इस समझौते का पालन करने की स्वीकृति दी थी।
इस समझौते से खुद को अलग करने के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा, ‘‘आज अमेरिका ने पेरिस समझौते से अलग होने की प्रक्रिया शुरू कर दी। इस समझौते की शर्तों के मुताबिक अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र को समझौते से अलग होने की औपचारिक सूचना भेज दी है। अधिसूचना देने के एक वर्ष बाद यह प्रभाव में आ जाएगा।
हालांकि अमेरिका के इस समझौते से खुद को अलग करने बाद विपक्षी डेमेाक्रेटिक पार्टी ने ट्रंप के इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने अमेरिका के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, ‘‘हमें इसका अफसोस है। अमेरिका इस समझौते से खुद को अलग कर रहा है। उनके इस समझौते से अलग हो जाने के बाद जलवायु तथा जैव विविधता के संबंध में फ्रांस तथा चीन के बीच साझेदारी और भी आवश्यक हो गई है।