इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू
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इस्राइल में दो-दो चुनावों के बाद भी सरकार न बना पाने के कारण देश को एक साल से भी कम समय में तीसरी बार चुनावों का सामना करना पड़ रहा है। अब तीसरा चुनाव पहले दोनों की तुलना में ज्यादा निर्णायक होगा क्योंकि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भ्रष्टाचार के तीन गंभीर मामलों में आरोपित हो चुके हैं और विपक्ष पर तय समयावधि में सरकार बनाने में नाकाम रहने का आरोप है।
तीसरे चुनाव से पहले विपक्ष का आरोप है कि साल में तीसरी बार चुनाव के लिए नेतन्याहू जिम्मेदार हैं, क्योंकि वह अपने आपको कानूनी मामलों से बचाना चाहते हैं। दरअसल तीसरी बार चुनाव के लिए सांसद एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराते नजर आए।
सांसदों ने एक प्रस्ताव पास कर संसद को भंग कर दिया क्योंकि बुधवार मध्यरात्रि तक सरकार बनाने की समय सीमा खत्म होने के बाद भी कोई पार्टी सरकार नहीं बना पाई। हालांकि सांसदों ने इससे पहले ही संसद भंग करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। सांसदों ने 2 मार्च 2020 को मतदान के लिए प्रस्ताव पास किया है।
इससे पहले इस्राइल में इसी साल अप्रैल और सितंबर में आम चुनाव हुए थे और दोनों बार किसी भी एक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। अब तीसरे चुनाव में भी नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और बेनी गैंट्ज की ब्लू एंड व्हाइट पार्टी बहुमत के लिए जोर लगाएंगी।
आरोप प्रत्यारोप
बुधवार को कार्यवाहक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने विपक्षी बेनी गैंट्ज की पार्टी की ओर इशारा करते हुए अपने बयान में कहा, उन्होंने हमारे ऊपर चुनाव थोपा है। जबकि जवाब में गैंट्ज ने कहा कि नेतन्याहू की कानूनी मुश्किलें और भ्रष्टाचार के मामलों के कारण ही इस्राइल में तीसरी बार चुनाव होने जा रहा है।
नेतन्याहू पर आरोप
बेंजामिन नेतन्याहू पर तीन अलग-अलग आपराधिक मामले हैं, जिनमें जालसाजी, रिश्वतखोरी और विश्वासघात के आरोप शामिल हैं। 70 वर्षीय नेतन्याहू इस्राइल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहने वाले नेता भी हैं। नेतन्याहू चाहते थे कि संसद ऐसा प्रस्ताव पास करे जिससे उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों में सजा न दी जा सके।