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दुनिया का एकमात्र ऐसा देश जहां तलाक अवैध है

Fri, 28 Sep 2018 06:35 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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Divorce
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2011 में अपने 84वें जन्मदिन पर पूर्व फिलिपिनो सीनेटर रामन रेविला फिल्म स्टार से राजनेता बन गए। इस दौरान उन्होंने अपने सम्मान में 10 मीटर ऊंची कास्ंय प्रतिमा का अनावरण किया। रेविला की ज्यादातर फिल्में भूलने लायक हैं जबकि सांसद के रूप में उनकी उपलब्धियां मामूली थीं। लेकिन उन्हें अलग-अलग 16 महिलाओं द्वारा कम से कम 72 बच्चे पैदा करने के लिए फिलीपींस में लंबे समय तक याद किया जाएगा। उन 16 में से केवल उनकी एक पत्नी थी। इनमें से 38 बच्चे उनके उपनाम का ही प्रयोग करते हैं। बताया जाता है कि फिलीपींस में आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ जो किसी ने अपने लिए ऐसा स्टैच्यू बनवाया हो जबकि ये भी स्पष्ट नहीं है कि यह स्टैच्यू किस उपलब्घि के लिए बनवाया गया है। 
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बता दें कि फिलीपींस दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जो अपने अधिकांश नागरिकों को तलाक से इंकार कर देता है। यह कैथोलिक देशों के एक समूह का हिस्सा है जहां चर्च ने विवाह की पवित्रता पर अपने विचारों को लागू करने के लिए कड़ी मेहनत की है। पोप फ्रांसिस ने पिछले हफ्ते ही इस देश का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने अपने बिशपों से तलाकशुदा कैथोलिकों के प्रति और अधिक माफी मांगने का आग्रह किया है।

फिलीपींस में तलाक को वैध बनाने वाला बिल विधायिका से पहले है। लेकिन बेनिनो एक्विनो राष्ट्रपति के समर्थन के बिना कानून बनाना मुश्किल है। वह नहीं चाहते कि फिलिपींस लास वेगास की तरह बन जाए। जहां आप सुबह शादी कर लेते हैं और दोपहर में तलाक लेते हैं।
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एक्विनो ने बिशपों और तीन साल पहले बहिष्कार के उनके खतरों को नजरअंदाज कर दिया जब उन्होंने एक प्रजनन स्वास्थ्य कानून पर हस्ताक्षर किए जो गरीब महिलाओं को सब्सिडी वाले गर्भ निरोधकों को प्रदान करता है। उनका पहला बड़ा फैसला 1970 में आया जब इटली ने वेटिकन के विरोध के बावजूद तलाक को वैध बनाया। इसके बाद 1974 के जनमत संग्रह में इतालवी तलाक कानून को रद्द करने का प्रयास काफी हद तक खारिज कर दिया गया था। फिर ब्राजील आया, जिसने 1977 में तलाक को वैध बनाया, इसके बाद स्पेन 1981, अर्जेंटीना 1987, आयरलैंड 1997, और चिली ने 2004 में इसे वैध किया।  

फिलीपींस दुनिया का इकलौता एशियाई मुल्क हैं जहां तलाक पर प्रतिबंध है। हालांकि लंबी कोशिशों के बाद तलाक से जुड़ा एक विधेयक संसद में पेश किया गया है जिसके पारित होने पर संशय बरकरार है। यूरोपीय देश माल्टा भी तलाक को कानूनी रूप से लागू करने में काफी पीछे रहा है। यहां के संविधान में तलाक को गैरकानूनी करार दिया गया है। लेकिन यहां के कानून में बदलाव करते हुए 2011 में इसमें बदलाव किया गया और तलाक के कानून को पहली बार लागू किया गया। नए कानून में अब तलाक के लिए अर्जी दी जा सकती है। 

वैसे ही चिली में भी तलाक लेने की प्रक्रिया काफी मुश्किल है। यहां पर तलाक लिया तो जा सकता है लेकिन उसके लिए काफी मुश्किलें हैं। इसके लिए जरूरी है कि पति-पत्नी 1 से 3 साल तक अलग रह रहे हों। या फिर ऐसा करने के लिए उसके पास कोई बड़ा कारण होना चाहिए, जिसे वह साबित कर सके। 

जापान में शादीशुदा जोड़ों को बिना अदालत जाए एक कागज पर दस्तखत करने के बाद तलाक मिल जाता है। हालांकि यहां पर कई तरह की मुश्किलें भी होती हैं। यहां के कानून में बच्चे की सुरक्षा से जुड़ा कोई प्रावधान नहीं है। जापान में औरत को अगली शादी के लिए तलाक के 6 महीने बाद तक का इंतजार करना पड़ता है लेकिन पुरुषों पर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है। इसलिए महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। 

मिस्र में भी महिलाओं पर तलाक का कानून हावी है। यह कानून यहां पर 2000 में लागू किया गया था। इस कानून के बाद भी महिलाओं के लिए अदालतों में पहुंचना आसान नहीं है। यहां पर मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को बिना किसी कानूनी सलाह के तलाक दे सकते हैं जबकि मुस्लिम महिलाएं अपने पति की इजाजत से अदालत में जाकर ही तलाक ले सकती हैं।
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