लंदन की टेम्स नदी का किनारा रविवार को 'हर-हर गंगे' के जयकारों से गूंज उठा। हजारों लोगों की मौजूदगी में पहली बार हरिद्वार-काशी की तर्ज पर गंगा आरती हुई। आखिर इस अनोखी आरती में ऐसा क्या खास था, जिससे भारतीय परंपरा के साथ पर्यावरण का संदेश भी दिया गया? पढ़िए रिपोर्ट,
ब्रिटेन की टेम्स नदी के किनारे रविवार को पहली बार हरिद्वार-काशी की तर्ज पर ऐतिहासिक गंगा आरती का आयोजन हुआ। ग्रीनविच स्थित ओल्ड रॉयल नवल कॉलेज के पास हुए अनोखे आयोजन में हजारों लोग जुटे।
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वैदिक मंत्रों के उच्चारण, शंखनाद और विशाल पीतल के दीपों की रोशनी के बीच पूरा नदी तट ‘हर-हर गंगे’ के जयकारों से गूंज उठा। 13 सितंबर की शाम को यह कार्यक्रम चिन्मय मिशन यूके ने वार्षिक ‘टोटली टेम्स’ उत्सव के सहयोग से किया। यह आयोजन चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के वैश्विक समारोह का हिस्सा था। इस कार्यक्रम की चर्चा पूरे ब्रिटेन में हो रही है।
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टेम्स में नहीं बहाए फूल-मूर्तियां...
कार्यक्रम में पर्यावरण और नदी की पवित्रता का खास ध्यान रखा गया। गंगा आरती की परंपरा को टेम्स के किनारे दोहराया गया, लेकिन आरती पूरी तरह जमीन पर की गई। नदी में फूल या किसी तरह की मूर्ति प्रवाहित नहीं की गई, ताकि टेम्स की स्वच्छता प्रभावित न हो।
भक्ति से मिटते हैं मतभेद...
चिन्मय मिशन के ग्लोबल हेड स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि जब लोगों के पास भक्ति और समर्पण का साझा केंद्र होता है तो वे अपने मतभेद भूलकर एक साथ आते हैं। यह एकता, प्रेम और सद्भाव की भावना है। उन्होंने बताया कि गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद हिमालय से वेदांत के ज्ञान को लेकर आए और अपना जीवन इसे फैलाने में लगाया।
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स्वरूपानंद ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य लंदन के बीचों-बीच लोगों को आध्यात्मिक रूप से एक साथ लाना और मां गंगा की उस भावना को याद करना था, जो परंपरा, संस्कृति और ज्ञान की धारा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि टेम्स के किनारे मां गंगा की दिव्यता और सुंदरता का स्मरण कराया गया।
शिक्षा और सेवा का भी संदेश
आरती के बाद संस्था की ओर से ब्रिटेन में शिक्षा, ग्रामीण विकास और सेवा के क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की जानकारी भी दी गई। इस आयोजन के जरिए भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी-दोनों का संदेश देने की कोशिश की गई।