तालिबान के साथ राजनीतिक समाधान के लिए शुरू वार्ता के विशेष प्रतिनिधि जलमय खलीलजाद ने अफगानिस्तान से अमेरिका व नाटो सैनिकों के देश छोड़ने के बाद पहली बार सार्वजनिक बयान दिया है।
उन्होंने कहा, यदि राष्ट्रपति अशरफ गनी अचानक देश छोड़कर भागे न होते तो हालात कुछ और होते। तालिबान के साथ अंतिम समय में बनी सहमति पर गनी के भागने से पानी फिर गया। फाइनेंशियल टाइम्स को दिए साक्षात्कार में खलीलजाद ने कहा कि सियासी समाधान के लिए तालिबान से चल रही वार्ता में कट्टरपंथियों को काबुल से अलग रखने और राजनीतिक हस्तांतरण पर बातचीत हो रही थी।
इस योजना के तहत गनी को कतर में किसी समझौते पर पहुंचने तक पद पर बने रहना था। योजना के तहत तालिबान के काबुल में दरवाजे तक पहुंचने पर भी उन्हें भागना नहीं था। लेकिन 15 अगस्त को गनी के भागने से सुरक्षा व्यवस्था में खालीपन आ गया।