11 सितंबर, 2001 को न्यूयॉर्क में हुए ट्विन टॉवर हमले के बाद अमेरिकी सेना यहां घुस गई थी। 20 साल के दौरान यहां करीब 66,000 अफगान सैनिक और 48,000 नागरिक संघर्ष में मारे गए।
तालिबान ने 20 साल के युद्ध के बाद अफगानिस्तान से अमेरिकी नेतृत्व वाले सैनिकों की वापसी की पहली वर्षगांठ मनाने के लिए राजधानी को रंगीन रोशनी से जगमगा दिया। साथ ही बुधवार को राष्ट्रीय अवकाश भी घोषित किया। देश के नए शासक तालिबान को औपचारिक रूप से किसी अन्य देश से मान्यता नहीं मिली है। तालिबान ने इस गरीब देश पर सख्त इस्लामी कानून को फिर से लागू कर दिया है। लेकिन प्रतिबंधों और गहराते मानवीय संकट के बावजूद कई अफगानों का कहना है कि उन्हें खुशी है कि तालिबान विद्रोह की वजह बनने वाली विदेशी ताकत चली गई है।
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20 साल के दौरान करीब 66 हजार अफगान सैनिक मारे गए
काबुल के रहने वाले जलमई ने कहा, हमें खुशी है कि अल्लाह ने हमारे देश से काफिरों को छुटकारा दिलाया और इस्लामिक अमीरात की स्थापना हुई। पिछले साल 31 अगस्त की रात सैनिकों की वापसी ने अमेरिका के सबसे लंबे युद्ध को समाप्त कर दिया। 11 सितंबर, 2001 को न्यूयॉर्क में हुए ट्विन टॉवर हमले के बाद अमेरिकी सेना यहां घुस गई थी। 20 साल के दौरान यहां करीब 66,000 अफगान सैनिक और 48,000 नागरिक संघर्ष में मारे गए। इसी दौरान अमेरिका ने भी 2,461 सैनिकों को गंवाया जो अमेरिकी जनता के लिए असहनीय हो चला था। अन्य नाटो देशों के 3,500 से अधिक सैनिक भी यहां मारे गए।
काबुल में जीत का जश्न
अमेरिकी सेना ने मंगलवार को कहा कि अफगानिस्तान में युद्ध का बोझ अमेरिकियों के लिए भारी साबित हुआ। पिछले साल सैनिकों की वापसी की समाप्ति से दो हफ्ते पहले तालिबान ने सरकारी बलों के खिलाफ हमले के बाद सत्ता पर कब्जा कर लिया था। तीन साम्राज्यों अमेरिका, रूस और ब्रिटेन के खिलाफ जीत का जश्न मनाने वाले बैनर बुधवार को काबुल में लहरा रहे थे। इस्लाम की आस्था की घोषणा वाले सैकड़ों सफेद तालिबान के झंडे लैम्पपोस्ट और सरकारी भवनों पर उड़ रहे थे। मंगलवार देर रात काबुल के ऊपर का आसमान तालिबान लड़ाकों की भीड़ से आतिशबाजी और जश्न की गोलियों से जगमगा उठा। मसूद स्क्वायर में पूर्व अमेरिकी दूतावास के पास तालिबान के झंडे लिए सशस्त्र लड़ाके "अमेरिका की मौत" के नारे लगा रहे थे। बाकी लोग भोंपूबजाते हुए शहर भर में घूमते रहे।
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अफगानिस्तान में ही छूट गए अमेरिकी सैन्य उपकरण
तालिबान के सोशल मीडिया अकाउंट्स ने नए प्रशिक्षित सैनिकों के कई वीडियो और तस्वीरें पोस्ट कीं। इनमें दिखाया गया कि किस तरह कई अमेरिकी सैन्य उपकरण उनके सैनिकों की वापसी की जल्दबाजी में पीछे ही छूट गए। ट्विटर पर पोस्ट किए गए दीवार पर बने एक विशाल तालिबान ध्वज पर लिखा था- आप एक महाशक्ति को अपमानित करके और उन्हें वापस भागने पर मजबूर करने के बाद इस तरह ट्रोल करते हैं।
तालिबान के गर्व के बावजूद अफगानिस्तान के तीन करोड़ 80 लाख लोग अब एक हताश मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं। अरबों डॉलर की संपत्ति जब्त हो गई है और विदेशी सहायता भी बंद हो गई है। आम अफगानों, खासकर महिलाओं के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। तालिबान ने कई प्रांतों में माध्यमिक लड़कियों के स्कूल बंद कर दिए हैं और महिलाओं को कई सरकारी नौकरियां करने से रोक दिया है।