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Mikhail Gorbachev Death: बाहर सत्कार, देश में दुत्कार- इस तजुर्बे के साथ जिंदगी गुजारी मिखाइल गोर्बाचेव ने

Wed, 31 Aug 2022 06:50 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को

सार

Mikhail Gorbachev Death: गोर्बाचेव का मंगलवार देर रात 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे 1985 में सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और सोवियत संघ के राष्ट्रपति बने थे। उसके बाद उन्होंने ग्लासनोश्त (खुलेपन) और पेरेस्त्रोइका (पुनर्रचना) की नीतियां लागू कीं, जिनसे शीत युद्ध खत्म होने का रास्ता तैयार हुआ...
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Mikhail Gorbachev Death: Mikhail Gorbachev with Rajiv gandhi during India Visit - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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पूर्व सोवियत संघ के आखिरी राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव को अपनी जिंदगी के आखिर 31 साल दोहरे अनुभव के साथ जीना पड़ा। वाशिंगटन, पेरिस, और लंदन में उन्हें बहुत सराहना मिली। लेकिन रूस में उनके प्रति दुत्कार का भाव रहा। उनके कथित सुधारों के जो उथल-पुथल भरे परिणाम हुए, उसके लिए रूस के लोगों ने उन्हें कभी माफ नहीं किया। ये बातें ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने गोर्बाचेव के निधन के बाद अपनी श्रद्धांजलि में कही हैं।

गोर्बाचेव का मंगलवार देर रात 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे 1985 में सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और सोवियत संघ के राष्ट्रपति बने थे। उसके बाद उन्होंने ग्लासनोश्त (खुलेपन) और पेरेस्त्रोइका (पुनर्रचना) की नीतियां लागू कीं, जिनसे शीत युद्ध खत्म होने का रास्ता तैयार हुआ। इसका आखिरी नतीजा सोवियत संघ के विघटन और कम्युनिस्ट विचारधारा के खिलाफ पश्चिमी खेमे की वैचारिक जीत के रूप में सामने आया।

साल 2021 में गोर्बाचेव की विरासत के बारे में रूस में एक सर्वे रिपोर्ट जारी हुई थी। इसके मुताबिक रूस के 70 फीसदी से ज्यादा लोगों ने राय जताई कि गोर्बाचेव के राज में देश गलत दिशा में गया। इसके पहले हुए सर्वेक्षणों में गोर्बाचेव को रूसी इतिहास का सबसे अलोकप्रिय नेता घोषित किया गया था।

गोर्बाचेव देश के अंदर अपने प्रति लोगों की नकारात्मक राय से परिचित थे। इसके बावजूद वे अपने सुधारों का बचाव करते रहे। उन्होंने कहा- ‘मैंने वे कदम इसलिए उठाए, क्योंकि उस समय लोग देश में एक अलग प्रकार के नेतृत्व की अपेक्षा रख रहे थे।’ गोर्बाचेव को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इससे मिले धन के जरिए उन्होंने 1993 में नोवाया गजेटा नाम के अखबार की शुरुआत की थी। एक समय यह देश में सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला अखबार बन गया था। हाल में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद बनी स्थितियों में यह बंद हो गया।

विलियम तॉबमैन की लिखी गोर्बाचेव की जीवनी 2017 में प्रकाशित हुई थी। इसमें उन्होंने कहा है- गोर्बाचेव की मुख्य समस्या यह थी कि रूस के लोगों को वैसी स्वतंत्रता का अनुभव नहीं था, जैसी उन्होंने उपलब्ध कराने की कोशिश की। यही बात रूस के उदारवादी अर्थशास्त्री रुसलान ग्रिनबर्ग ने भी कही है। गोर्बाचेव को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा है- ‘गोर्बाचेव ने हमें तमाम तरह की आजादी दीं, लेकिन हमें नहीं मालूम था कि हम उन आजादियों का क्या करें।’

विश्लेषकों के मुताबिक मौजूदा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ गोर्बाचेव के रिश्ते हमेशा ही पेचीदा रहे। जब 2016 में पुतिन ने राष्ट्रपति के तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ने का फैसला किया, तो गोर्बाचेव ने उसकी कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने तब पुतिन की नीतियों को प्रगति की राह में बाधक बताया था। उधर पुतिन ये राय जताते रहे हैं कि सोवियत संघ का अंत भू-राजनीतिक रूप से ‘बीसवीं सदी की सबसे भयंकर घटना’ थी। गोर्बाचेव के निधन के बाद पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने सिर्फ यह कहा कि पूर्व सोवियत नेता के निधन से राष्ट्रपति बहुत दुखी हैं और उन्होंने गोर्बाचेव के परिवार को अपना शोक संदेश भेजा है।

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