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तालिबान 2.0: अफगान महिलाओं ने मांगा अपना हक, सरकार में शामिल करने को लेकर हेरात में प्रदर्शन

Thu, 02 Sep 2021 09:08 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कोई भी सरकार महिलाओं के समर्थन के बिना टिकाऊ नहीं है। इसलिए महिलाओं को अगली सरकार में शामिल किया जाना चाहिए। 
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अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति - फोटो : Social media
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विस्तार
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तालिबान शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद अफगानिस्तान में अपनी सरकार बनने की घोषणा कर सकता है। सरकार गठन को लेकर लगभग तैयारी पूरी हो गई है। इस बीच अफगान महिलाओं ने अपना हक मांगते हुए महिलाओं को सरकार में शामिल किए जाने की मांग की है। पश्चिमी शहर हेरात में बड़ी संख्या में दर्जनों अफगान महिलाओं और लड़कियों ने आज विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। 

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अंतरराष्ट्रीय मीडिया के मुताबिक प्रदर्शनकारियों में महिला संगठन की महिलाएं, विश्वविद्यालय की छात्राएं और सरकारी कर्मचारी शामिल हुईं। प्रदर्शनकारियों ने पिछले दो दशकों की उपलब्धियों को संरक्षित करने और अगली सरकार में महिलाओं की भागीदारी देने के लिए नारे लगाए। उन्होंने महिलाओं के काम करने और उन्हें शिक्षा प्राप्त करने के अधिकार की भी वकालत की। हेरात ईरानी सीमा के पास अफगानिस्तान का प्राचीन शहर है। यह अफगानिस्तान के सबसे समृद्ध शहरों में से एक है और लड़कियों ने वहां स्कूल जाना शुरू कर दिया है। 

सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों में काम करने वाली अफगान महिलाओं ने कहा है कि तालिबान को उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकता क्योंकि उन्हें दो दशकों में अपने अधिकारों के लिए कड़ी मेहनत की है और वापस नहीं लौटना चाहतीं।प्रदर्शन में शामिल महिलाओं और लड़कियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगान महिलाओं को नहीं भूलने का अनुरोध भी किया। 
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तालिबान के खिलाफ बोलने की हिम्मत जुटा रहीं 
तालिबान शासन के बाद अफगानिस्तान में कुछ महिलाएं हिम्मत जुटा कर तालिबान के खिलाफ बोल रही हैं और महिलाओं को जागरुक बनाने में लगी हैं। 17 अगस्त को, चार महिलाओं ने काबुल की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया था। जबकि सात महिलाओं ने 19 अगस्त को शहर के वजीर अकबर खान इलाके में अफगान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अफगानी झंडा लहराया और तालिबान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। 

अफगानिस्तान की संसद की पूर्व सदस्य फावजिया कूफी ने पिछले सप्ताह कहा था कि महिलाओं की मौजूदगी के बिना भविष्य की सरकार पूरी नहीं होगी। उन्होंने कहा था "मुझे लगता है कि अफगान महिलाओं को पहले से कहीं ज्यादा एकजुट होने की जरूरत है। कोई भी उन्हें उनका अधिकार आसानी से नहीं देगा। उन्हें एकजुट होना होगा, उन्हें गारंटी देनी होगी कि उनकी मौजूदगी है, और उन्हें यह स्वीकार्य नहीं है कि वे अपने घरों के कोने में बैठी रहें।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय को महिलाओं के अधिकार छीन जाने की चिंता
अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तालिबान शासन में महिलाओं के अधिकार छीने जाने का सबसे ज्यादा डर सता रहा है। वैसे यह डर निराधार भी नहीं माना जा रहा है क्योंकि काबुल पर काबिज होते ही तालिबान ने महिलाओं की आजादी और उनके अधिकारों को दबाने के अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। काबुल पर कब्जा करने के बाद अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि महिलाओं को शरीया कानून के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अधिकार होंगे।

मुजाहिद ने कहा था महिलाएं स्वास्थ्य क्षेत्र और उन क्षेत्रों में काम कर सकती हैं, जहां उनकी उनकी जरूरत होगी। पिछले हफ्ते तालिबान ने घोषणा की थी कि लड़के-लड़कियां अलग-अलग कक्षाएं में पढ़ेंगे। इस विद्रोही समूह ने कई टीवी और रेडियो में काम करने वाली महिला पत्रकारों के काम करने पर रोक लगा दी है। उनके डर से कई महिला पत्रकारों ने यह पेशा छोड़ दिया है।

तालिबान में कोई बदलाव नहीं 
अफगानिस्तान की स्वतंत्र महिला पत्रकार सायजा सोजाई बताती हैं कि यह सच है कि कुछ महिलाएं हिम्मत जुटा कर सड़कों पर उतर रही हैं, लेकिन बहुत सारी महिलाएं और विश्वविद्यालय की छात्राएं भी दबे-छुपे अपने अधिकारों पर बात कर रही हैं। उनका कहना है कि तालिबान पर भरोसा नहीं किया जा सकता। हम 20 साल बाद भी उनमें कोई बदलाव नहीं देख रहे हैं।  उन्होंने 1996-2001 के बीच तालिबान के पिछले शासन का जिक्र करते हुए कहा, उस समय भी महिला शिक्षा और रोजगार पर प्रतिबंध लगाया गया था और हमें डर है कि एक बार फिर हमें पीछे धकेल दिया जाएगा। 

2001 के बाद महिलाओं के अधिकार बहाल हुए थे
यूएएस स्टेट डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक 1996 में तालिबान के पहले शासन से पहले 1980 क दशक में 70 फीसदी महिलाएं स्कूलों में पढ़ाती थीं। 50 फीसदी महिलाएं विश्वविद्यालयों में पढ़ रही थीं। पूरे देश में 40 फीसदी महिला डॉक्टर थीं। लेकिन 1996 के बाद हालात बदल गए। सात हजार से ज्यादा महिलाओं को नौकरी से निकाल दिया गया। आठ हजार छात्राओं को अपनी पढ़ाई बंद करनी पड़ी। तालिबान के शासन में महिलाओं को हर तरह की आजादी से वंचित कर दिया गया।

2001 में अमेरिकी सैनिकों के देश में तैनात होने के बाद महिलाओं के अधिकार बहाल हुए। अफगान मंत्रालयों में लगभग आधी सिविल सेवा नौकरियों में महिलाओं का कब्जा है  लेकिन महिला संगठनों को चिंता है कि नई सरकार में, शीर्ष पदों पर और कैबिनेट में शायद ही महिलाओं को जगह दी जाए।  

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