ताइवान ने चीन को एक बड़ा झटका दिया है। उसने बड़ा साहस दिखाते हुए चीन का ‘एक देश, दो व्यवस्था’ वाला प्रस्ताव ठुकरा दिया है। ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग वेन ने कहा है कि उन्हें चीन का प्रस्ताव मंजूर नहीं है। ताइवान का कहना है कि यह फॉर्मूला हांगकांग में पूरी तरह से नाकाम हो गया है ऐसे में इसे स्वीकार करने का कोई सवाल ही नहीं उठता है।
हाल ही में चीन ने स्पष्ट किया था कि वह ताइवान के विलय को लेकर सैन्य ताकत का इस्तेमाल भी कर सकता है। राष्ट्रपति जिनपिंग इस द्वीप को अपने में मिलाने का कह चुके हैं। कुछ समय पहले चीनी रक्षा मंत्री जनरल वेई फेंगहे ने भी मातृभूमि के एकीकरण को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ने का बयान दिया था। दरअसल ताइवान 1950 से ही स्वतंत्र देश रहा है लेकिन चीन उसे अपना विद्रोही राज्य मानता रहा है।