कोरोना वायरस के कहर ने कई देशों के बीच आपसी दूरियां बढ़ा दी हैं। तमाम देशों ने चीन पर गलतबयानी करने के आरोप मढ़े हैं। चीनी गणराज्य का द्वीप ताइवान ने भी चीन को लेकर नाराजगी दिखाई है और कहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की बैठक में हिस्सा लेने के लिए उसे चीन से इजाजत लेने की कोई जरूरत नहीं है।
ताइवान ने आरोप लगाया है कि चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को कोरोना प्रभावित ताइवानी लोगों की संख्या गलत बताई है। ताइवानी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसके कोरोना प्रभावित मरीजों की संख्या 18 है और चीन में ऐसे 44 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं।
दरअसल विश्व स्वास्थ्य संगठन की बैठक में स्वतंत्र हिस्सेदारी को लेकर चीन और ताइवान में तनाव की स्थिति बनी रही है। ताइवान ने कई बार कोशिश की वह अपनी स्वास्थ्य समस्याओं और जरूरतों के लिए सीधे डब्ल्यूएचओ की बैठक में हिस्सेदारी करे और अपनी बात रखे, लेकिन चीनी गणराज्य होने की वजह से उसे यह मौका नहीं मिल पा रहा था।
पिछले हफ्ते ताइवान को यह मौका मिला और उसने वहां अपनी बात रखी और सीधे तौर पर चीन पर गलतबयानी के आरोप लगाए।
उधर चीनी विदेश मंत्रालय ने दावा किया है कि ताइवान को डब्ल्यूएचओ की बैठक में शामिल करने की मंजूरी चीन ने ही दी थी। जबकि ताइवान विदेश मंत्रालय ने चीन पर जबरदस्ती इसका श्रेय लेने का आरोप लगाया है। उसने कहा है कि ताइवानी विशेषज्ञ बैठक में अपनी निजी हैसियत से गए, न कि किसी की इजाजत लेकर।
इन आरोप प्रत्यारोप के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि उसने यह बैठक कोरोना के बारे में जमीनी हकीकत जानने और मेडिकल सेवाएं देने या कोरोना को लेकर रिसर्च के नए आयाम तलाशने के लिए बुलाई थी।
पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र और चीन के बीच हुई बैठक के दौरान भी ताइवान का मुद्दा उठा था, जिसमें तय हुआ था कि ताइवान से डब्ल्यूएचओ सीधे बात करे। जबकि चीन ने इसका विरोध किया था और अमेरिका पर चीन और ताइवान के बीच दरार डालने की कोशिश करने ता आरोप लगाया था।