विश्व मानवाधिकार संगठनों ने सीरिया में आईएस और अमेरिकी नेतृत्व वाली गठबंधन सेना के बीच हुए संघर्ष की एक रिपोर्ट उजागर की है जिसमें इस युद्ध का बेहद ही घृणित चेहरा सामने आया है। यह रिपोर्ट वर्ष 2017 में जून से अक्तूबर के बीच पांच माह ही है जो बताती है कि इस अवधि में गठबंधन सेनाओं ने सीरिया में आईएस के खिलाफ जो अभियान चलाया उसमें 1600 आम नागरिकों की मौत हुई।
एमनेस्टी इंटरनेशनल और पर्यवेक्षक समूह एयरवॉर्स ने कहा है कि उन्होंने हमलों वाली 200 जगहों की जांच करके 1000 पीड़ितों की पहचान की है। जबकि अमेरिकी गठबंधन सेनाओं ने इस अभियान में सिर्फ 180 आम लोगों की मौत की पुष्टि की है। इसकी प्रतिक्रिया में इन मानवाधिकार संगठनों ने गठबंधन सेनाओं को स्पष्ट किया कि वे दो साल से इन मौतों को लेकर किया जा रहा खंडन बंद करें।
बता दें कि पिछले माह ही इस सैन्य गठबंधन के समर्थन वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्स ने आईएस के आखिरी गढ़ ‘रक्का’ पर कब्जा कर आतंकी समूह की स्वघोषित ‘खिलाफत’ का अंत करने की घोषणा की थी। एमनेस्टी और एयरवॉर्स ने ओपन सोर्स इंफॉर्मेशन की गहन पड़ताल की जिसमें सोशल मीडिया पोस्ट को भी शामिल किया गया। इस जांच में 1600 से अधिक आम नागरिकों की मौत होने की जानकारी मिली।
निशाने पर नहीं थी बमबारी, तबाह हुआ रक्का
एमनेस्टी की वरिष्ठ सलाहकार डोनाटेला रोवेरा ने कहा, आईएस लड़ाकों और बारूदी सुरंगों ने शहर को मौत के जाल में तब्दील कर दिया था मगर गठबंधन की ओर से की गई अधिकतर बमबारी निशाने पर नहीं थी। तोपों से भी हजारों गोले अंधाधुंध दागे गए। ऐसे में आश्चर्य नहीं कि इस कार्रवाई में सैकड़ों लोग मरे और घायल हुए। उन्होंने कहा, गठबंधन सेनाओं ने रक्का को तबाह कर डाला मगर वे सच को नहीं मिटा सकते।
इस तरह हुई मानवाधिकार संगठनों की पड़ताल
एमनेस्टी इंटरनेशनल और एयरवॉर्स के जांचकर्ताओं ने सीरिया में आईएस द्वारा राजधानी बनाए शहर रक्का में दो माह बिताकर हमले वाली जगहों की बारीकी से पड़ताल की। इन मानवाधिकार संस्थाओं ने 400 से अधिक प्रत्यक्षदर्शियों और हमलों में जिंदा बचे लोगों से बात भी की। एमनेस्टी का कहना है कि वे मरने वालों में से 641 की पुष्टि सीधे तौर पर हुई जबकि शेष की पुष्टि विभिन्न स्रोतों के माध्यम से की गई।